बिहार मुख्यमंत्री उद्यमी योजना 2025: ₹10 लाख लोन, ₹5 लाख माफ़ी — आवेदन शुरू



📢 बिहार मुख्यमंत्री उद्यमी योजना 2025 — पूरी जानकारी हिंदी में

📌 योजना का नाम:

बिहार मुख्यमंत्री उद्यमी योजना 2025

📌 योजना का उद्देश्य:

राज्य के बेरोजगार युवाओं, महिलाओं, पिछड़ा वर्ग (MBC), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), और दिव्यांगजनों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना।


📌 योजना का लाभ:

  • ₹10 लाख तक का लोन
  • ₹5 लाख तक अनुदान (लोन माफ़ी)
  • शेष ₹5 लाख पर ब्याज रहित ऋण
  • व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए प्रशिक्षण सुविधा
  • ऑनलाइन आवेदन और पारदर्शी चयन प्रणाली

📌 पात्रता:

  • बिहार राज्य का स्थायी निवासी
  • आयु: 18-50 वर्ष
  • न्यूनतम 10वीं कक्षा उत्तीर्ण
  • किसी सरकारी सेवा में कार्यरत न हों
  • पूर्व में इसी योजना का लाभ न लिया हो

📌 आवेदन की प्रक्रिया:

  1. www.startupbihar.gov.in पर जाएं
  2. “मुख्यमंत्री उद्यमी योजना” सेक्शन चुनें
  3. ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें
  4. सभी दस्तावेज़ स्कैन करके अपलोड करें
  5. आवेदन की रसीद प्रिंट कर लें

📌 जरूरी दस्तावेज़:

  • आधार कार्ड
  • निवास प्रमाण पत्र
  • 10वीं की मार्कशीट
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • बैंक खाता विवरण
  • जाति प्रमाण पत्र (SC/ST/MBC के लिए)

📌 आवेदन की अंतिम तिथि:

30 जुलाई 2025


📌 महत्वपूर्ण लिंक:

👉 ऑनलाइन आवेदन करें
👉 ऑफिशियल नोटिफिकेशन पढ़ें


📌 लोन वितरण प्रक्रिया:

  • आवेदन सत्यापन के बाद चयन
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम
  • कंप्यूटर लॉटरी के ज़रिए अंतिम चयन
  • ₹5 लाख अनुदान व ₹5 लाख ब्याज रहित ऋण वितरण
  • लोन किस्तों में चुकाना

📌 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs):

Q. क्या इसमें गारंटी या जमानत देनी होगी?
👉 नहीं, योजना में कोई गारंटी ज़रूरी नहीं।

Q. लोन चुकाने की अवधि कितनी है?
👉 ब्याज रहित ₹5 लाख का ऋण 7 साल में चुकाना होगा।

Q. क्या पहले लाभ ले चुके लोग आवेदन कर सकते हैं?
👉 नहीं।


📢 निष्कर्ष:

अगर आप बिहार के युवा, महिला या व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक हैं — तो मुख्यमंत्री उद्यमी योजना 2025 आपके लिए शानदार मौका है। तुरंत आवेदन करें और स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाए । 

Blood / Rakat/khun/ रक्त/बल्ड/खुन/ के बारे में जानकारी



📌 रक्त (Blood) क्या है?

रक्त हमारे शरीर का एक तरल संयोजी ऊतक (Liquid Connective Tissue) है, जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन, पोषक तत्व, हार्मोन, वेस्ट प्रोडक्ट्स (अपशिष्ट पदार्थ) को पहुँचाने और शरीर की रक्षा करने का काम करता है।


📌 रक्त का रंग क्यों लाल होता है?

रक्त में हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन होता है, जिसमें आयरन (लौह तत्व) होता है। जब यह ऑक्सीजन से मिलता है, तो इसका रंग चमकीला लाल हो जाता है। यही वजह है कि हमारा रक्त लाल रंग का होता है।


📌 रक्त की संरचना (Composition of Blood)

रक्त दो भागों से मिलकर बना होता है:

1️⃣ द्रव भाग (Liquid Part) — प्लाज्मा (Plasma)

  • रक्त का 55% भाग प्लाज्मा होता है।
  • इसमें 90% पानी और 10% प्रोटीन, ग्लूकोज़, हार्मोन, इलेक्ट्रोलाइट्स, एंटीबॉडी आदि होते हैं।
  • यह पोषक तत्वों और हार्मोन्स को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है।

2️⃣ कोशिकीय भाग (Cellular Part)

रक्त का 45% भाग तीन तरह की कोशिकाओं से बनता है:

कोशिका का नाम काम
लाल रक्त कोशिका (RBC) ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन
सफेद रक्त कोशिका (WBC) शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना
प्लेटलेट (Platelets) खून को थक्का (clot) बनाकर बहाव रोकना

📌 रक्त के प्रकार (Blood Groups)

रक्त चार प्रमुख समूहों में बाँटा गया है:

  • A
  • B
  • AB
  • O

हर समूह Rh फैक्टर (पॉजिटिव या नेगेटिव) के आधार पर भी बँटा होता है।
उदाहरण: A+, A-, B+, B- आदि।

O- को Universal Donor कहा जाता है और AB+ को Universal Recipient


📌 रक्त का कार्य (Functions of Blood)

  1. शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुँचाना।
  2. अपशिष्ट पदार्थ (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, यूरिया) बाहर पहुँचाना।
  3. रोग प्रतिरोधक तंत्र को मजबूत करना।
  4. शरीर का तापमान नियंत्रित रखना।
  5. हार्मोन्स और दवाइयों का संचार करना।
  6. खून बहने पर थक्का बनाकर खून रोकना।

📌 रक्त का निर्माण (Formation of Blood)

रक्त का निर्माण अस्थिमज्जा (Bone Marrow) में होता है।

  • लाल रक्त कोशिका की उम्र — लगभग 120 दिन
  • प्लेटलेट्स की उम्र — 7 से 10 दिन
  • सफेद रक्त कोशिका की उम्र — कुछ घंटों से लेकर कुछ साल तक

📌 रक्तदान (Blood Donation)

  • स्वस्थ व्यक्ति 18-60 वर्ष तक, कम से कम 50 किलोग्राम वजन होने पर रक्तदान कर सकता है।
  • रक्तदान करने से शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती, बल्कि नया रक्त बनता है।
  • रक्तदान जीवनदान है।

📌 रक्त से जुड़ी प्रमुख बीमारियाँ

  • एनीमिया (Anemia) — खून में हीमोग्लोबिन की कमी
  • लीकेमिया (Leukemia) — रक्त कैंसर
  • हीमोफीलिया (Hemophilia) — खून का थक्का नहीं बनना
  • डेंगू में प्लेटलेट्स की कमी

📌 रक्त का महत्व

रक्त शरीर की जीवन रेखा है। इसके बिना शरीर का कोई अंग जीवित नहीं रह सकता। यह शरीर के हर कोने तक ज़रूरी चीज़ें पहुँचाकर और अपशिष्ट बाहर निकालकर हमें स्वस्थ रखता है।


 


मज़ेदार सामान्य ज्ञान प्रश्न जो हर बच्चे को जानना चाहिए

 

20 मज़ेदार सामान्य ज्ञान प्रश्न जो हर बच्चे को जानना चाहिए

सामान्य ज्ञान न सिर्फ बच्चों के लिए पढ़ाई में मददगार होता है, बल्कि उनके सोचने-समझने की शक्ति भी बढ़ाता है। आज हम आपके लिए लाए हैं 20 मज़ेदार और आसान सामान्य ज्ञान प्रश्न, जो हर बच्चे को पता होने चाहिए। चलिए, शुरू करते हैं!

सामान्य ज्ञान प्रश्न और उत्तर:

  1. भारत के पहले प्रधानमंत्री कौन थे?
    उत्तर: पंडित जवाहरलाल नेहरू
  2. भारत का राष्ट्रीय पशु कौन है?
    उत्तर: बाघ
  3. भारत की राजधानी कौन सी है?
    उत्तर: नई दिल्ली
  4. सूरज किस दिशा से उगता है?
    उत्तर: पूर्व
  5. भारत का राष्ट्रीय फूल कौन सा है?
    उत्तर: कमल
  6. भारत का राष्ट्रीय पक्षी कौन है?
    उत्तर: मोर
  7. सबसे बड़ा ग्रह कौन सा है?
    उत्तर: बृहस्पति (Jupiter)
  8. इंद्रधनुष में कितने रंग होते हैं?
    उत्तर: 7
  9. सबसे तेज दौड़ने वाला जानवर कौन है?
    उत्तर: चीता
  10. सबसे लंबा नदी कौन सी है?
    उत्तर: नील नदी (Nile River)
  11. सबसे छोटी हड्डी कहाँ होती है?
    उत्तर: कान में
  12. भारत का राष्ट्रीय खेल कौन सा है?
    उत्तर: हॉकी
  13. ताजमहल कहाँ स्थित है?
    उत्तर: आगरा
  14. भारत का राष्ट्रीय ध्वज कितने रंगों का होता है?
    उत्तर: 3 (केसरिया, सफेद, हरा)
  15. मनुष्य के शरीर में कुल कितनी हड्डियाँ होती हैं?
    उत्तर: 206
  16. सबसे बड़ा महासागर कौन सा है?
    उत्तर: प्रशांत महासागर (Pacific Ocean)
  17. अंग्रेज़ी वर्णमाला में कुल कितने अक्षर होते हैं?
    उत्तर: 26
  18. भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री कौन थीं?
    उत्तर: इंदिरा गांधी
  19. दूध को दही में कौन बदलता है?
    उत्तर: लैक्टिक एसिड
  20. रात में आसमान में सबसे चमकदार ग्रह कौन सा दिखता है?
    उत्तर: शुक्र ग्रह (Venus)

निष्कर्ष:

उम्मीद है आपको ये 20 मज़ेदार और रोचक सामान्य ज्ञान प्रश्न पसंद आए होंगे। आप इन्हें अपने बच्चों या छात्रों के साथ ज़रूर शेयर करें। इस तरह के सवाल बच्चों का ज्ञान भी बढ़ाते हैं और पढ़ाई में रुचि भी।

आपकी राय:

अगर आप ऐसे और भी सामान्य ज्ञान प्रश्नों की लिस्ट चाहते हैं, तो नीचे कमेंट ज़रूर करें। अगली बार हम और मज़ेदार सवाल लाएंगे!

हिंदी वर्णमाला और उनके सही उच्चारण | आसान और प्रभावशाली तरीका

 

हिंदी वर्णमाला और उनके सही उच्चारण | आसान और प्रभावशाली तरीका

हिंदी हमारी मातृभाषा है और इसकी वर्णमाला का सही उच्चारण जानना हर बच्चे और सीखने वाले के लिए ज़रूरी है। सही उच्चारण से न सिर्फ हमारी भाषा सुंदर बनती है, बल्कि संवाद में भी आत्मविश्वास बढ़ता है। आज हम हिंदी वर्णमाला और उनके उच्चारण को आसान तरीके से सीखेंगे।

हिंदी वर्णमाला के प्रकार:

हिंदी वर्णमाला में कुल 52 अक्षर होते हैं, जो 2 भागों में बाँटे गए हैं:

1️⃣ स्वर (Vowels)

कुल 11: स्वर - अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ,

अयोगवाह- 2: अं, अः

हिंदी वर्णमाला और उनके सही उच्चारण | आसान और प्रभावशाली तरीका



2️⃣ व्यंजन (Consonants)

कुल 39: 

क, ख, ग, घ, ङ, 

च, छ, ज, झ, ञ, 

ट, ठ, ड, ढ, ण, 

त, थ, द, ध, न, 

प, फ, ब, भ, म, 

य, र, ल, व, 

श, ष, स, ह,

 क्ष, त्र, ज्ञ


हिंदी वर्णमाला और उनके सही उच्चारण | आसान और प्रभावशाली तरीका



सही उच्चारण सीखें:

स्वर उच्चारण:

अक्षर उच्चारण
‘अ’ जैसा अनार, अभी
‘आ’ जैसा आम
‘इ’ जैसा इमली
‘ई’ जैसा ईंट
‘उ’ जैसा उल्लू
‘ऊ’ जैसा ऊन
‘ऋ’ जैसा ऋषि
‘ए’ जैसा एक
‘ऐ’ जैसा ऐनक
‘ओ’ जैसा ओखली
‘औ’ जैसा औरत
अं‘अं’ जैसा अंगूर
अःहल्का ह के साथ ‘अ’

व्यंजन उच्चारण:

  • कवर्ग-  क , ख, ग, घ, ङ — गले से यानी कंठ
  • चवर्ग- च, छ, ज, झ, ञ — तालू से
  • टवर्ग- ट, ठ, ड, ढ, ण — मूंह के ऊपरी भाग से
  • तवर्ग-  त, थ, द, ध, न — दांतों के पास
  • पवर्ग - प, फ, ब, भ, म — होंठों से
  • अंतस्थ - य, र, ल, व — जीभ और तालू से
  •  उष्म- श, ष, स, ह — सांस के साथ
  • संयुक्त- क्ष, त्र, ज्ञ ,श्र — मिश्रित ध्वनि

अभ्यास कैसे करें:

  • रोज़ाना 5-10 मिनट शीशे के सामने बोलकर अभ्यास करें।
  • बच्चों को खेल-खेल में वर्ण सिखाएँ।
  • वर्णमाला गीत या कविता के साथ उच्चारण करवाएँ।

निष्कर्ष:

हिंदी वर्णमाला का सही उच्चारण सीखना सरल और मज़ेदार है। अगर हम रोज़ थोड़ा अभ्यास करें, तो बच्चों और बड़ों दोनों की भाषा सुंदर और स्पष्ट हो जाएगी।

आपकी राय:

क्या आप अगला ब्लॉग हिंदी व्याकरण या कविता पर चाहते हैं? नीचे कमेंट करें या हमें बताएं।

प्रतिवेदन कैसे लिखें ? (How to write report)

प्रतिवेदन कैसे लिखें ? (How to write report)

नमस्कार दोस्तों web Hindi duniya में आपका स्वागत है। आज हम लोग प्रतिवेदन क्या होता है ? प्रतिवेदन कैसे लिखते हैं ? प्रतिवेदन के बारे में बेहतर तरीके से समझने का प्रयास करते हैं। इस विषय पर चर्चा करते हैं।



आज  दिनांक 17/06/21 को प्रखंड संसाधन केंद्र टिहरी के प्रांगण में निष्ठा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्कूल हे टीचर फॉर हॉलिस्टिक इन्वेस्टमेंट प्रशिक्षण के तीनों बैच का संयुक्त उद्घाटन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी महोदय ने अपने संबोधन में शिक्षक पद की गरिमा के अनुरूप कार्य करने का आ्हवान किया। साथ ही निष्ठा प्रशिक्षण से प्राप्त नवाचार, शिक्षण कौशल एवं तकनीक का सौ पर्सेंट प्रयोग कर विद्यालय में बच्चों के बीच कराने की अपील की, तदनुपरांत पुष्पगुच्छ देकर सभी प्रशिक्षकों का स्वागत किया गया।

चेतना सत्र में गुरु वंदना, अभियान गीत ( तू ही राम रहीम....... ) के बाद आंतरिक ऊर्जा के लिए एक मिनट का मौन रखा गया।

प्रशिक्षक महोदय ने सर्वप्रथम एक गतिविधि कराई तथा सभी लोगों का परिचय प्राप्त किया। इसके बाद सीआरसी वाइज व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर pre test, online test के लिए लिंक भेजा गया। इस test में शिक्षण अभिवृत्ति, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला समेकित शिक्षा आदि से संबंधित 40 प्रश्नों का उत्तर दिया जाना था। साथ ही आईसीटी एवं योजना से संबंधित स्वआकलन के कुछ प्रश्न भी पूछे गए । सभी लोग द्वारा अपना उत्तर सबमिट करने के बाद सदन को भोजन अवकाश के लिए स्थगित किया गया।

भोजनावकाश के बाद द्वितीय सत्र में स्वास्थ्य एवं कल्याण पर चर्चा की गई । इसमें कहा गया कि बच्चों का उत्तम स्वास्थ्य बेहतर अधिगम की पहली शर्त है इसके विभिन्न आयाम शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं भावनात्मक पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि निरोग रहना तनाव रहित होना संवेदनशीलता सामाजिक समायोजन तथा अनुकूलन आदि उत्तम स्वास्थ्य के मानक हैं

तदनुपरांत विकास की विभिन्न अवस्थाओं में शब्द भंडार तथा लैंगिक आधार पर शारीरिक मानसिक एवं भावनात्मक परिवर्तन पर सभी विचार विमर्श हुआ। प्रशिक्षक महोदय द्वारा राजू माहिर एवं सुनील की कहानी सुनाकर वैयक्तिक भिन्नता को स्वीकार करने तथा बच्चे की रूचि के अनुसार मार्गदर्शन करने की आवश्यकता है।


इस विषय पर और अधिक गहराई से समझने के लिए सदन के प्रतिभागियों के समूह में विभक्त कर, उक्त विषयों से संबंधित विभिन्न समूहों के लिए अलग-अलग प्रश्न निर्धारित किया गया। तत्पश्चात प्रत्येक समूह की सदस्य द्वारा उक्त विषय से संबंधित प्रस्तुतीकरण किया गया। अंत में सभी बिंदुओं पर चर्चा कर समाप्त करते हुए प्रशिक्षक महोदय द्वारा सदन की समापन की घोषणा की गई। 

प्रतिवेदक का नाम

प्रखंड

विद्यालय का नाम

दिनांक

Application for mutation दाखिल खारिज कराने हेतु आवेदन पत्र

 Application for mutation दाखिल खारिज कराने हेतु आवेदन पत्र 

दोस्तों, आज इस ब्लॉग में हम लोग चर्चा करने वाले हैं कि दाखिल खारिज कैसे होता है ? कहां होता है ? किसके पास जाना पड़ता है। आवेदन कैसे लिखते हैं? किसी भी प्रकार के आवेदन पत्र लिखने के लिए कमेंट कर सकते हैं।

सेवा में,
         श्रीमान् अंचलाधिकारी, महोदय
         प्रखंड - पाली, जिला - पटना
विषय - दाखिल खारिज कराने हेतु।
महाशय,
           उपरोक्त विषय के संदर्भ में कहना है कि मेरे दस्तावेज के अनुसार पवन कुमार, पिता- अनिल चौधरी, पता -  गांधीनगर , खाता संख्या - 275, खेसरा संख्या - 320, थाना नंबर -796 है। दाखिल खारिज कराने हेतु, ऑनलाइन आवेदन भी कर दिया हूँ।
               अतः श्रीमान से आग्रह है कि उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए। दाखिल खारिज करने की कृपा की जाय।
                                             विश्वासभाजन
                                         नाम - पवन कुमार
                                         पिता अनिल चौधरी
                                         खाता संख्या - 275
                                         खेसरा संख्या - 320
                                         थाना संख्या -796
                                         दिनांक :-

अनुलग्नक :-
1) दस्तावेज की छायाप्रति।
2) दाखिल खारिज कराने हेतु ऑनलाइन आवेदन पत्र की छायाप्रति।


लंबे समय तक पढ़ाई करने का तरीका। How to study for a long time

लंबे समय तक पढ़ाई करने का तरीका (How to study for a long time)



नमस्कार दोस्तों,  Web Hindi Duniya में आपका स्वागत है। आज बहुत से विद्यार्थी को लंबे समय तक पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। इस टॉपिक पर बेहतर टिप्स एंड ट्रिक्स के साथ पढ़ाई से संबंधित सभी समस्याओं का हल करने का प्रयास करने जा रहा हूँ।

प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में अच्छे कार्य एवं सफलता के परिणाम चाहते हैं, लेकिन पुरानी आदतों को बदलना तथा नये आदतों अपनाना पड़ता है।

वैसे तो हमारे मनोवैज्ञानिक भी कहते हैं कि लंबे समय तक पढ़ाई के दौरान प्रत्येक 40 से 50 मिनट में 5 से 10 मिनट का ब्रेक लेना चाहिए। जिससे पढ़ाई उबाऊ नहीं होते हैं। उस 5 से 10 मिनट के ब्रेक में मोबाइल से दूर रहें, क्योंकि एक बार सोशल मीडिया में जाने के बाद समय एक घंटे या 2 घंटे में बदल जाता है। इसलिए ब्रेक में आप गाने को गुनगुना सकते हैं।  इससे मस्तिष्क को बहुत ही ज्यादा आराम मिलता है। फिर आप पढ़ाई के लिए तैयार हो जाते हैं।

वैसे सफल इंसान बनने के लिए कुछ त्यागना पड़ता है, तब वह सफल इंसान बनता है। लंबे समय तक पढ़ाई करने के लिए अपने दैनिक जीवन इन सर्वोत्तम तरीकों को उपयोग करन चाहिए। ताकि लंबे समय तक पढ़ाई करने में सफल हो।

लंबे समय तक पढ़ाई करने का सर्वोत्तम तरीका निम्न हैं।

पढ़ाई करने का मंत्र

शांत वातावरण का चुनाव

पढ़ाई करने वाले कमरे का उपयोग

निरंतरता

आलस का त्याग करना

टेबल कुर्सी का उपयोग

योग एवं ध्यान

गलत तरीके से पढ़ाई करना

खानपान सही रखना

रात्रि के नींद

दिमाग को केंद्रित करना

समय के अनुसार पढ़ाई के स्थान को बदलना

सकारात्मक विचार

अनुशासित

नोट्स बनाना

लक्ष्य निर्धारण करना

समय का सदुपयोग करना

इंटरनेट का प्रयोग

अपने दोस्तों के साथ समय बिताना

पढ़ाई करने का मंत्र-: पढ़ाई करने से पूर्व अपने शरीर एवं मन को स्वयं ही तैयार एवं दिमाग को तरोताजा रखना चाहिए।सबसे पहले 40 मिनटों में आसान विषय के पढ़ाई करें। ताकि आपका पढ़ाई में इंटरेस्ट हो। इसके बाद कठिन विषयों या कमजोर महसूस करने वाले विषयों की पढ़ाई करनी चाहिए। उस विषय में आप बहुत अच्छे हो जाएंगे।

शांत वातावरण का चुनाव-: लंबे समय तक पढ़ाई में ध्यान आकृष्ट करने के लिए हमें शांत वातावरण होना अति आवश्यक है। जब तक शांत माहौल नहीं रहेगा, तो पढ़ाई करने में मन नहीं लगेगा। जहां शोर-शराबा नहीं हो और आप सुकून से पढ़ाई कर सकें। पढ़ाई करने में आपको कोई दिक्कत या परेशानी का सामना नहीं करना पड़े हैं। वैसे जगहों का चुनाव अति आवश्यक है।

लंबे समय तक पढ़ाई करने का तरीका (How to study for a long time)

लंबे समय तक पढ़ाई करने का तरीका (How to study for a long time)




पढ़ाई करने वाले कमरे का उपयोग-: जिस कमरे में पढ़ाई करनी है उस कमरे में रोशनी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए ताकि आंखों पर प्रेशर न पड़े। कमरे की दीवार से एक या 2 फीट की दूरी पर स्टडी टेबल लगाना चाहिए। ताकि पढ़ाई में मन लग सके तब आप लंबे समय तक पढ़ाई कर सकते हैं

निरंतरता-: लंबे समय तक पढ़ाई करने की आदत बचपन से ही डालनी चाहिए। पढ़ाई प्रतिदिन करने से दिमाग पर अधिक बोझ नहीं पड़ता और  फ्रेश भी रहता है। निरंतर पढ़ाई करने के कारण ही आप लंबे समय तक पढ़ाई कर सकते हैं।

आलस का त्याग करो-: आलस करने वाले विद्यार्थी अपने दोस्तों से हमेशा पिछड़े हुए रहते हैं। क्योंकि वह आलस करने के कारण ढ़ग से पढ़ाई नहीं कर पाते। इसलिए आलस को त्याग करो और लंबे समय तक पढ़ाई करते रहो। तब जाकर आपके जीवन सफल हो सकता है। प्रत्येक विद्यार्थी को पढ़ाई हो या अन्य कोई कार्य तुरंत ही करना चाहिए। विद्यार्थी को हमेशा ही एक्टिव रहना चाहिए।

टेबल कुर्सी का उपयोग-: लंबे समय तक पढ़ाई करने के लिए टेबल कुर्सी का उपयोग करना अति आवश्यक है। क्योंकि  रीड की हड्डी सीधे होने के कारण पढ़ाई में मन लगा रहता है। जिससे लंबे समय तक पढ़ पाते है। पढ़ाई करने का सही ढंग है। अगर टेबल कुर्सी लगाने का जगह नहीं हो तो नीचे चटाई पर बैठ कर पढ़ाई करें।

योग/ ध्यान-: प्रत्येक विद्यार्थी को प्रतिदिन सुबह या शाम 10 से 20 मिनट योग एवं ध्यान पर केंद्रित होना चाहिए। इससे विद्यार्थियों का मस्तिष्क तेजी से विकसित होता है। मस्तिक स्वस्थ होने के कारण पढ़ाई को अधिक से अधिक समय तक बैठकर पढ़ सकते हैं। आप सभी विद्यार्थी योग/ ध्यान जरूर करें। योग और प्राणायाम करने से आलस दूर होता है। स्वास्थ्य एवं संतुलित मस्तिष्क का निर्माण होता है। जिसे विद्यार्थी को लंबे समय तक पढ़ाई करने में मददगार साबित होता है।

खानपान सही रखना-: पढ़ाई की एक शानदार पारी खेलने के लिए खानपान पर भरपूर ध्यान रखना चाहिए। खाने में पौष्टिक आहार, साग सब्जी, ड्राई फ्रूट्स आदि का प्रयोग करते रहना चाहिए। पढ़ाई करने के लिए हमारे शरीर में ऊर्जा प्राप्त होता है। समय-समय पर पानी पीते रहना चाहिए। इसके अलावा चाय, भुना हुआ चना आदि का भी प्रयोग कर सकते हैं। जिससे लंबे समय तक पढ़ाई करने में आपको सहूलियत हो।

रात्रि की नींद-: प्रत्येक व्यक्ति को रात में 6 से 7 घंटे की अच्छी नींद लेनी चाहिए रात में अच्छी तरह से सोने के बाद सुबह आपको बहुत अच्छा महसूस होता है। इसे आप दिन भर पढ़ाई कर सकते तथा मन शांत रहता है। भरपूर नींद लेने से मन विचलित नहीं होता है जिस कारण पढ़ाई बहुत बढ़िया होता है।

दिमाग को केंद्रित करना-: पढ़ाई के लिए सबसे जरूरी है कि दिमाग को केंद्रित कर के पढ़ाई करने के लिए बैठना चाहिए। ताकि पढ़ाई करते वक्त अन्य विचार न आए। क्योंकि जैसे ही पढ़ने बैठते हैं, अनेकों प्रकार के मन में विचार उत्पन्न होने लगता है इस विचार से बचने के लिए दिमाग को केंद्रित करना अति आवश्यक है। तब आप लंबे समय तक पढ़ाई कर सकते हैं।

समय के अनुसार पढ़ाई के स्थान को बदलना-: एक ही जगह पर पढ़ाई करते करते थोड़ा मन विचलित होने लगता है। जिस कारण हम अपने घर में समय-समय पर पढ़ाई के स्थानों को बदलते रहना चाहिए। ताकि आपके पढ़ाई में मन लग सके।

समय का सदुपयोग-: टाइम इज मनी/ समय ही धन है। विद्यार्थी को समय का महत्व समझना अति आवश्यक है।समय के अनुरूप अपने विषयों को पढ़ने का प्रयास करने,तथा प्रत्येक विषय पर समान समय देना चाहिए। एक बार जब समय चला गया,तो दोबारा वह वापस नहीं आता। इसलिए समय को बर्बाद करने से आप खुद ही बर्बाद होंगे। समय के साथ चलने वाले व्यक्ति हमेशा सफल होते हैं। इसलिए समय का सदुपयोग करना अति आवश्यक है। समय के अनुसार लंबे समय तक पढ़ाई कर सकते हैं।

अनुशासित रहना-: प्रत्येक विद्यार्थी का कर्तव्य है कि अनुशासन में रहें, अनुशासन से ही वह अपने आप को आगे बढ़ा सकता है। एक विद्यार्थी की पहचान अनुशासन से ही होता है अनुशासित व्यक्ति अपने कार्य को समय पर पूरा करते हैं। तथा समय के पालन तथा प्रत्येक कार्य को समय पर करते हैं।

सकारात्मक विचार-: विद्यार्थी को हमेशा सकारात्मक सोच रखनीं चाहिए। सकारात्मक विचार से शरीर में  फुर्ती, जोश एवं सकारात्मक ऊर्जा का उत्पन्न होता है। हमेशा ही अपनी सोच को सकारात्मक रखनें का प्रयास करना चाहिए। हमेशा सकारात्मक सोच बनाए रखने के लिए बहुत सारे पुस्तकें आते हैं। उसे पढ़ने से मोटिवेशन मिलता  है।

नोट्स बनाएं-: आप जब भी पढ़ाई करने बैठे तो पढ़ते समय जो आपको अच्छा लगे एक कॉपी पर नोट करते जाए। ऐसे ही प्रत्येक विषय का नोट्स बना लें। परीक्षा के समय इसी नोट्स से पढ़ाई करें। इससे आपको समय का बचत होता है। और आप अधिक से अधिक विषयों को कवर कर लेंगे। परीक्षा के समय यह नोट्स बहुत उपयोगी साबित होता है।

लक्ष्य का निर्धारण-: विद्यार्थी को अपने जीवन में एक लक्ष्य का निर्धारण करना अति आवश्यक है। लक्ष्य निर्धारण के कारण ही पढ़ाई में मन लगा रहता है। तथा उस लक्ष्य पर निगाहें टिकी रहती है। जब तक प्राप्त नहीं होता, तब तक उस लक्ष्य को छोड़ना नहीं। लंबे समय तक पढ़ाई करने के लिए हमें बहुत जरूरी है कि लक्ष्य निर्धारण करना।

इंटरनेट का प्रयोग-: प्रॉब्लम सॉल्विंग के लिए इंटरनेट एक अच्छा साधन है। लेकिन एक सीमित समय के लिए ही उपयोग करें। क्योंकि माइंड को डाइवर्ट करने में इसको देरी नहीं लगता। इसलिए इंटरनेट के प्रयोग केवल कठिन प्रश्नों के उत्तर के लिए ही किया जाए। ताकि आपका समय बच सके।

निष्कर्ष-: उपरोक्त सभी कथनों को ध्यान से पढ़ें और मनन करते हुए उस पर विचार करें। पढ़ाई करने का मंत्र ,शांत वातावरण का चुनाव,पढ़ाई करने वाले कमरे का उपयोग,निरंतरता,आलस का त्याग करना,टेबल कुर्सी का उपयोग,योग एवं ध्यान,गलत तरीके से पढ़ाई करना,खानपान सही रखना,रात्रि के नींद,दिमाग को केंद्रित करना,समय के अनुसार पढ़ाई के स्थान को बदलना,सकारात्मक विचार,अनुशासित,नोट्स बनाना,
लक्ष्य निर्धारण करना, समय का सदुपयोग करना,
इंटरनेट का प्रयोग,अपने दोस्तों के साथ समय बिताना। जिस समय पढ़ाई करना हो। उस समय सारा सामग्री यानी कॉपी, कलम, नोट्स, बुक आदि लेकर। यहां तक कि पीने की पानी भी ले कर बैठना चाहिए। जिस कारण पढ़ाई में कोई दिक्कत न उत्पन्न हो। आपका समय भी बर्बाद न हो। आपको हमेशा यह ध्यान देना चाहिए कि लंबे समय तक पढ़ने के लिए इन सभी वस्तुओं को ध्यान में रखकर पढ़ने बैठा जाए ।

दोस्तों यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। ये आर्टिकल पसंद आया हो या इस आर्टिकल में किसी भी तरह की सुधार की ज़रुरत हो तो, कृपया हमें अपनी राय अवश्य दें। ताकि हम अपने कमियों को सुधार सके।

धन्यवाद.

दिमाग को कैसे तेजी से बढ़ाएं। How to speed up a child's brain?

दिमाग को कैसे तेजी से बढ़ाएं। How to speed up a child's brain?

दोस्तों, आज हम लोग बच्चों के दिमाग को कैसे तेजी से बढ़ाएं। How to speed up a child's brain?  विषय पर चर्चा करने वाले हैं। बच्चों के मस्तिष्क यानी दिमाग को लेकर बहुत से अभिभावक परेशान रहा करते हैं। कुछ माता-पिता अपने बच्चों के लिए दवाई भी खिलाया  करते हैं।

अगर आप भी अपने बच्चों के दिमाग को कैसे तेजी से बढ़ाएं। How to speed up a child's brain? से परेशान हैं। तो आप सही जगह पर आए हुए हैं।

सभी बच्चों के दिमाग एक खाली डिब्बे की तरह होता है। बच्चे जैसे जैसे शिशु से आगे की अवस्था में आता है। जब बच्चे 1 या 2 साल के हो जाते हैं तब उनसे ऐसे सवालों को पूछा करते हैं। जो कभी किसी ने बताया नहीं, और वह तुरंत ही बता देते हैं जैसे- बाबू गेंद लाओ,मम्मी किधर हैं। भैया किधर है। अपना कान बताओ, नाक बताओ आदि। इससे यह साबित होता है कि बच्चे अपने दिमाग का प्रयोग करते हैं। वो जैसे भी करते हों।

वैसे 2 से 5 वर्ष के बच्चें बहुत सारे  क्रिएटिविटी करने लगते हैं। धीरे-धीरे वे अपने दिमाग का प्रयोग करने लगते हैं। हम लोग अपने आसपास कई  बच्चों को क्रिएटिविटी करते देखा होगा।

ऐसे सभी बच्चों का दिमाग एक समान नहीं होते हैं। माता-पिता, या अभिभावक को किसी बच्चे की तुलना अपने बच्चों से नहीं करनी चाहिए।

वैसे तो बच्चों के दिमाग को कैसे तेजी से बढ़ाएं। How to speed up a child's brain? के निम्न तरीकों के साथ हम लोग आगे बढ़ते हैं।

दिमाग तेज करने के लिए बच्चों को क्या खिलाएं?

हरेदार सब्जियां-: माता पिता अपने बच्चे को छोटी उम्र से ही हरेदार सब्जियां अत्यंत लाभकारी होता है। पालक, लौकी , गाजर, मूली, present of mind को बेहतर करता है। 🥦🥕🥒

मछली-: मछली खाने से आंखों की रोशनी बढ़ने के साथ-साथ दिमाग में बहुत तेज होता है, इसलिए अपने बच्चे को सप्ताह में एक बार मछली जरूर खिलाएं।
🐬🐟🐠

अंकुरित अनाज-: अपने बच्चे को सुबह में मूंग, चना, सोयाबीन दाना आदि, फुलाकर उसे अंकुरित होने के बाद गुड़ के साथ सेवन करने से दिमाग तेज हो जाता है। उससे  मस्तिष्क के साथ साथ शरीर के भी वृद्धि हो जाता है।

सुखा मेवा (ड्राई फ्रूट्स)-: अखरोट की बनावट मस्तिष्क से मिलता-जुलता होता है। प्रत्येक दिन सुबह में अखरोट खाने के बाद एक गिलास गाय के दूध का सेवन करें। अखरोट खाने से दिमाग बहुत ही तेज होता है। जिससे प्रजेंट ऑफ माइंड बेहतर हो जाता है। इसके अलावा कागजी बादाम almonds किसमिस, छुहारा इत्यादि खाने से भी हमारे दिमाग तेज होते हैं।

योगाभ्यास-: अपने बच्चे को नियमित योगाभ्यास कराने चाहिए। इससे शरीर और मस्तिष्क दोनों ही स्वस्थ रहेंगे। तब बच्चे का दिमाग तेज एवं विकसित होगा। अपने बच्चे को मेडिटेशन जरूर कराएं।

खेल कूद-: आमतौर पर देखा गया है कि जो बच्चे खेलकूद हैं। उनका दिमाग काफी तेज एवं  सृजनात्मक होता है। जैसे-: कबड्डी, फुटबॉल, हॉकी आदि। कुछ खेल वैसे होते हैं जैसे पजल, शब्दों का खेल, स्पेलिंग टेस्ट, पहेली, मैथमेटिक्स आदि। इस टाइप के खेल से बच्चे का दिमाग काफी विकसित होता है।

टीसी लेने के लिए आवेदन पत्र (Application form for taking T.C)

टी सी लेने के लिए आवेदन पत्र (Application form for  taking T.C)

दोस्तों, 

आज हम लोग अपने प्रधानाध्यापक के पास कैसे आवेदन पत्र लिखें।आवेदन पत्र पर हम लोग चर्चा करेंगे। आवेदन पत्र कैसे लिखा जाता है।

 

सेवा में, 
         श्रीमान्   प्रधानाध्यापक, महोदय 
         मध्य विद्यालय टंडवा,  पटना
विषय-विद्यालय परित्याग पत्र/टीसी लेने के संबंध में।
महाशय,
         उपर्युक्त विषय के संदर्भ में कहना है कि मैं मनीष कुमार, पिता- जितेंद्र कुमार, कक्षा -8 रौल न - 45, सत्र - 2014 -2015 में, मैं विद्यालय का नियमित छात्र था।मुझे विद्यालय परित्याग पत्र की आवश्यकता है।
                                        अतः श्रीमान् से नम्र निवेदन है कि‌ मुझे विद्यालय परित्याग पत्र देने की कृपा की जाय।

                                            ‌विश्वासभाजन
                                      नाम- मनीष कुमार
                                                कक्षा-      8 
                                                          सत्र-2014-2015 
                                                दिनांक

इस प्रकार विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, में टीसी लेने के लिए आवेदन पत्र लिखा जाता है।







 

 

बच्चों के स्मरण शक्ति कैसे बढ़ाए (How to increase children's memory)

दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में बच्चों के स्मरण शक्ति कैसे बढ़ाएं How to increase children's memory  पर हम लोग चर्चा करेंगे और इसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दे रहे हैं।

 

बच्चों के स्मरण शक्ति बढ़ाए Increase children's memor

आजकल अधिकांशतः देखा जा रहा है कि बच्चों के स्मरण शक्ति (Memory of children) में कमी होते जा रहा है। बच्चों के साथ उनके माता-पिता भाई-बहन एवं अन्य सभी सदस्यों को यह समस्या है।

आमतौर पर देखा गया है कि पहले की अपेक्षा स्मरण शक्ति में बहुत कमी आई है। जिसका एक ही कारण है, टेक्नोलॉजी यानी मोबाइल। जब से मोबाइल आया तब से बहुतों का स्मरण शक्ति में कमी होने लगा।

तो आज हम लोग खेल-खेल में बच्चों के स्मरण शक्ति बढ़ाने के तरीकों के बारे में जानेंगे। एक बात ध्यान देने योग्य है कि कोई भी काम आत्मविश्वास के साथ करने पर वह काम अवश्य होता है।

स्मरण शक्ति बढ़ाने के निम्न तरीके ―: Following ways to increase memory 


➡️सुबह उठने के बाद एवं रात्रि में सोने से पहले सकारात्मक सोच के साथ ये वाक्य बोलें। 


मैं अपने स्मरण शक्ति पर विश्वास करता हूँ।                     
मेरा स्मरण शक्ति बहुत अच्छा है।


➡️अपने बच्चे को कागजी बदाम की दो कलियों को रात के समय पानी में फूलने के लिए डाल दें। सुबह के समय ब्रश करने के बाद एक पत्थर पर रगड़ कर प्रतिदिन दूध के साथ दे।


➡️20 से 25 ग्राम मूंग को रात में फूलने के लिए डाल दें। सुबह के समय ब्रश करने के बाद प्रतिदिन मूंग के साथ गुड़ का सेवन करें।


➡️सुबह ब्रश करने के बाद खाली पेट मात्र एक कच्चा आंवला प्रतिदिन खाने से स्मरण शक्ति में वृद्धि होता है।

 
➡️अपने बच्चे को सुबह सुबह प्रतिदिन एक सेव(apple) खिलाने के 10 मिनट बाद एक कप दूध पिला दे। 

➡️प्रात: कालीन सूर्योदय से पहले हरे - हरे घासों पर खाली पैर (बिना चपल्ल) 10 से 20 मिनट तक टहलें।

➡️प्रातः कालीन सूर्योदय से पहले प्रतिदिन मात्र 10 मिनट हिंदी या इंग्लिश का सस्वर वाचन या मौन वाचन। उसमें 1 मिनट में अधिक से अधिक शब्द पढ़ने का प्रयास करें । जैसे 1 मिनट में 250 / 300 से ऊपर शब्द पढ़ने का प्रयास करे।

➡️प्रतिदिन सुबह में योग - अभ्यास और मेडिटेशन करें।

➡️बच्चों के स्मरण शक्ति बढ़ाने के सबसे अच्छा तरीका एक हल्का बैट और टेनिस गेंद लें। बैट को अपने हाथों से उठाकर अपने छाती के सामने रखें , उस पर गेंद को रख कर धीरे-धीरे गेंद को उछालें।गेंद को गिरने न दें। यह प्रक्रिया अपने समयानुसार  प्रतिदिन 10 से 15 मिनट तक करें।

➡️याद करने से पहले एक बार देख कर लिखिए, फिर उसके बाद याद कर के दो बार बिना देख कर लिखें।

➡️एक टेबल पर बहुत सारे वस्तु रखा हुआ है, तब मात्र 1 मिनट के लिए टेबल पर रखा सभी वस्तुओं को ध्यान से देख ले ।उसके बाद टेबल के सभी वस्तुओं को बिना देखे कॉपी पर लिखने से स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है।

➡️आप सभी से नम्र निवेदन है कि उपरोक्त दी गई जानकारी जो आप पर लागू हो या जो संभव हो उसे करें। 




    व्यक्तित्व के निर्माण में विद्यालय का योगदान।School's contribution in building personality


    व्यक्तित्व के निर्माण में विद्यालय का योगदान।School's contribution in building personality.


    प्रत्येक व्यक्ति में अपनी एक अलग पहचान या गुण होता है। एक दूसरे व्यक्ति के वह गुण या पहचान, किसी दूसरे व्यक्ति में नहीं होता है। प्रत्येक व्यक्ति एक दूसरे से भिन्न होता है। हर इंसान का अपना अलग-अलग विशिष्ट पहचान होता है। इसी पहचान या गुण के कारण उस व्यक्ति का व्यक्तित्व होता है। हर इंसान अलग-अलग कद काठी रंग एक दूसरे से भिन्न होते है। इसके स्वभाव संस्कार आदि में भिन्नता होता है। 

    एक बालक के व्यक्तित्व के निर्माण में परिवार से कहीं अधिक समाज के वातावरण का प्रभाव पड़ता है। बच्चे के गुणों के निर्माण में परिवार की भूमिका अहम होता है। बच्चों के प्रथम पाठशाला परिवार होता है। उस परिवार के प्रथम शिक्षक मां होती हैं। मां ही बच्चों के व्यक्तित्व के को निखारती हैं। मां घर में ऐसा वातावरण का निर्माण करती है कि बच्चे के व्यक्तित्व सृजनात्मक एवं गुणात्मक होता है। उसी समय से बच्चों में अनेकों ऐसे गुणों का विकास होता है। अगर यही गुण रह जाए तो निश्चित ही बच्चे अपने जीवन में व्यक्तित्व के धनी, आत्मविश्वासी, दृढ़ पराक्रमी हो जायेंगें। लेकिन बच्चे बड़े होते ही समाज से बहुत कुछ सीखने लगते हैं।  

    बच्चों के व्यक्तित्व के निर्माण में विद्यालय के शिक्षा अति आवश्यक है। विद्यालय के वातावरण से बच्चों के व्यक्तित्व के निर्माण में अधिक प्रभावशाली होता है। यदि बच्चे को विद्यालय में अनुकूल वातावरण प्राप्त हो तो वे सही दिशा में कदम रख सकते हैं। या वह अपने को प्रगति के पथ पर अग्रसर होते जाते हैं। 

    व्यक्तित्व के निर्माण में विद्यालय का योगदान।School's contribution in building personality.


    व्यक्तित्व के निर्माण में विद्यालय का योगदान।School's contribution in building personality.





    यदि विद्यालय का अनुकूल वातावरण न रहा तो योग्य एवं होनहार बच्चे का व्यक्तित्व से वंचित हो जाते हैं। यदि बच्चे निम्न स्तर की योग्यता  रखने वाले बच्चों को अच्छे वातावरण के अनुसार योग बनाया जा सकता है। विद्यालय के वातावरण के अनुसार बच्चों को योग एवं गुणकारी बनाया जा सकता है। बच्चे की योग्यता एवं क्षमता कैसा भी हो, वह विद्यालय के अच्छे वातावरण जैसा ही होगा।

    विद्यालय के अच्छे वातावरण में बच्चों की अच्छी आदतों का विकास  भी होता है। जिससे विद्यालय बच्चों को प्रभावित भी करता है। उनके व्यक्तित्व के निर्माण में परिवर्तन लाता है। विद्यालय के वातावरण से बच्चों में नैतिक विकास, शारीरिक विकास, मानसिक विकास, सामाजिक विकास के स्तर को ऊंचा उठाता है, ताकि वे परिवार समाज एवं विद्यालय में अपने आपको समायोजित कर सके।

    विद्यालय में वातावरण को अच्छी तरीके से प्रभावित करने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होता है। जिससे बच्चों में सही मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन मिलता है। जिससे बच्चों में व्यक्तित्व का निर्माण होता है।

    इसके फलस्वरूप कुछ बच्चों में कुंठा से ग्रसित होते हैं। शिक्षक के अच्छे आत्मीय व्यवहार के कारण धीरे-धीरे उन बच्चों को जो कुंठित के शिकार होते हैं। उनको उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन के कारण  बच्चे अच्छे कर पाते हैं। बच्चें शिक्षक के प्रति स्नेह, आदर का भाव अपने दिल में रखने लगते हैं। इससे बच्चों में व्यक्तित्व एवं चरित्र का निर्माण होता है। 

    विद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य एवं शारीरिक स्वास्थ्य होना बहुत ही जरूरी होता है। विद्यालय के व्यक्तित्व में ज्ञान, कौशल एवं दृष्टिकोण का होना अति आवश्यक है। जिससे बच्चों में अनुशासन विकसित होता है। 

    बच्चों में आत्म संयम, सहयोग, आपसी विचार एवं भाव आदि के गुणों को विकसित करने में सहायक होते हैं। विद्यालय को उत्तम स्वरूप देने के लिए बाल केंद्रित मनोविज्ञान की अवधारणा होना चाहिए। जिससे बच्चे विद्यालय की ओर आकृष्ट होते और सीखने में उनकी प्रेरणा मिलता है। 

    विद्यालय का वातावरण स्वच्छ होना अति आवश्यक है। तभी बच्चों का मन प्रसन्न होता है। शिक्षक को विद्यालय के वातावरण को आनंददायक और कक्षा कक्ष को भी आनंदित बनाने अति आवश्यक होता है। ताकि व्यक्तित्व के निर्माण में विद्यालय का योगदान महत्वपूर्ण है।
    School's contribution in building personality.





















    उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन प्रतिभा को निखारता है।Proper guidance and encouragement enhances talent.

    उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन प्रतिभा को निखारता है।(Proper guidance and encouragement enhances talent.)


    जब विद्यार्थी सफलता का मुकाम हासिल करना चाहता है, या अपने जीवन को सफल करने के लिए जो उड़ान भरना चाहता है। उससे पूर्व अभिभावक व शिक्षक उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन उसके प्रतिभा को अवश्य ही निखारता है। 

    अभिभावक व शिक्षक छात्रों के सुनहरे भविष्य के लिए उचित मार्गदर्शन दे सकते हैं। जिससे छात्रों के शरीर के अंदर, ऊर्जा उत्साह, जोश, एवं जुनून का संचार उत्पन्न होता है। जिससे विद्यार्थी जीवन में सफलता प्राप्त होता है।

    हमेशा से ही देखा गया है कि छात्रों को विषय का चुनाव सही ढंग से नहीं कर पाते। कई छात्र-छात्राओं को देखा गया है कि बिना सोचे समझे विषय का चुनाव कर लेते हैं। बहुत सारे विद्यार्थी अपने दोस्तों, रिश्तेदार, भाई बहन को देखकर विषयों का चुनाव करते हैं। फिर बाद में उनको समझ आता है कि विषय का चुनाव गलत हो गया। बहुत से छात्र अपने अभिभावक या माता-पिता के दबाव में आकर विषय का चुनाव करते हैं। जिसके फलस्वरूप छात्रों को आगे चलकर वह विषय बोझिल  या उबाऊ लगने लगता है। कई छात्र-छात्राओं एक दूसरे के देखा देखी में विषयों का चुनाव करते हैं। जिस कारण उनको आगे समझ में नहीं आता या समझना मुश्किल हो जाता है।

    जिस विद्यार्थी ने अपने विषय का चुनाव सोच समझ कर लिया है या उस विषय में वह ज्ञान या रूचि रखता है, तो वह विद्यार्थी हमेशा ही सफल होगा।

    अभिभावक एवं शिक्षक को छात्रों एवं विद्यार्थियों को बीच-बीच में उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन देते रहें, ताकि अभिभावक
    एवं शिक्षक को यह पता चलता रहे, कि विद्यार्थी लक्ष्य प्राप्त करने में सक्षम है या नहीं। अगर नहीं, तो विद्यार्थी को उचित मार्गदर्शन करने की जरूरत होता है। ताकि उचित मार्गदर्शन से छात्र अपने जीवन में लक्ष्य की प्राप्ति कर सके।

    हमारे समझ से उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन अपने बच्चों को शुरुआती दिनों यानी 3 से 5 वर्ष के उम्र में ही शुरू करना चाहिए ताकि आगे अपने जीवन में हमेशा ही सफलता के मुकाम को हासिल कर सके।

    लेकिन एक और बात यह है कि कोई जरूरी नहीं है कि 3 से 5 वर्ष के उम्र ही हो। आप जब चाहे तब से ही अपने बच्चों या छात्रों को उचित मार्गदर्शन कर सकते हैं। वहां मैं कम उम्र इसलिए कहा कि बच्चें को शुरुआत से ही उचित मार्गदर्शन देते रहे तो अपने जीवन में हर समय क्रियाशील रहेंगे।

    अधिकांशतः विद्यार्थी 10वीं परीक्षा के बाद ही अपने लक्ष्य या सफलता को लेकर चिंतित रहते हैं। इस समय अभिभावक एवं शिक्षक को मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन नितांत ही आवश्यक है और समय उचित सलाह देना जरूरी होता है, क्योंकि बहुत सारे विद्यार्थी को उचित मार्गदर्शन प्राप्त न होने के बावजूद वह गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं तथा विद्यार्थी अपने नैतिक पतन की ओर चल देते हैं। वे अपने जीवन जीने के लिए गलत तरीकों को अपनाते चले जाते हैं। इससे अपना जीवन बर्बाद कर लेते हैं। इसलिए ऐसे समय में हर अभिभावक एवं शिक्षक को बच्चों एवं छात्रों को उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन देना अति आवश्यक है। 
    निष्कर्ष :-  उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन प्रतिभा को निखारता है। हमें अपने बच्चे एवं विद्यार्थी को बचपन से ही उचित मार्गदर्शन देना चाहिए। ताकि भविष्य में अपने जीवन को उस ऊंचाई पर ले जा सके। जहां से पीछे दिखने पर सभी छोटे या बौने रूपी दिखें। शिक्षक का कार्य केवल यह नहीं है कि शिक्षा देना, अपितु विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हो। अगर विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास होगा। तब विद्यार्थी का जीवन सफल होता है। उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन प्रतिभा को निखारता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन प्रतिभा को निखारता है। यह निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

    अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2019. International Yoga Day 2019.

    अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2019. International Yoga Day 2019.



    भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2019.(International Yoga Day 2019.), प्रत्येक वर्ष 21 जून को मनाने का फैसला लिया गया। जो मानव जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।


    आज योग का नया अविष्कार नहीं हुआ है। यह प्राचीन काल से ही ऋषि मुनि, साधु, महात्मा आदि। योग अभ्यास किया करते थे। उनके जीवन में शारीरिक कष्ट नहीं हुआ। वे लोग जीवन भर स्वस्थ रहते थे। बहुत से महात्माओं ने योगाभ्यास के बारे में बताया है, जो लोग योग अभ्यास किया उनका जीवन खुशहाल बना रहा।

    अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) मनाने का कारण-: 


    मानव जीवन में इतनी व्यस्तता बढ़ गई है कि अपने शरीर पर ध्यान देने का समय नहीं मिल रहा है। जिस कारण उनका शरीर स्वस्थ नहीं रह पाता, तब मनुष्य को योग अभ्यास करना अति आवश्यक हो गया।


    योग को नियमित करने से कोई भी बीमारी नहीं होता या अगर हुआ भी है तो जड़ से खत्म हो जाता है। नियमित योगाभ्यास करने से बहुत लोगों को लाभ हुआ है।


    योग क्या है-: 


    योग एक ऐसा कला है जिसे सीख कर अपने जीवन में आने वाला कोई भी रोग या बीमारी नहीं होने देगा तथा असाध्य रोगों को भी ठीक करते देखा गया है।


    हमारे जीवन के लिए योग महत्वपूर्ण है, यानी योग से हम सभी जीवन भर रोग मुक्त रहेंगे, तो हमें योग हर हाल में प्रतिदिन करना चाहिए। जिससे हमारा जीवन खुशहाल एवं आनंदित रहे।


    योग क्यों जरूरी-: आजकल इस प्रतियोगी संसार में कितना भाग दौड़ का जीवन है कि हमारे जीवन में किसी प्रकार का कोई कठिनाइयां नहीं होगा यानी रोग मुक्त रहेंगें। इसलिए योग अत्यंत जरूरी है। जीवन को सुरक्षा प्रदान करने के लिए योग जरूरी एवं अनिवार्य है। योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाना होगा।


    योग से लाभ-: नियमित योग करने से तन, मन, धन सभी का बचत होगा। क्योंकि योगाभ्यास करने से कोई रोग नहीं होगा। रोग नहीं होगा तो पैसा, यानी धन का बचत होगा जब धन का बचत, तब तन एवं मन भी ठीक-ठाक रहेेगा।


    योग करने का स्थान-: योग करने के लिए स्थान का चुनाव करना बहुत ही महत्वपूर्ण है। योग करने के लिए एक खुला, शांत वातावरण की जरूरत होता है। ऐसे हम छत,बालकोनी, पार्क, या एक खुला स्थान आदि होना चाहिए। जो योग करने के लिए अच्छा होता है।


    योग करने का समय क्या-: योग करने का सही समय सूर्योदय से पहले का योगाभ्यास बहुत लाभदायक रहता है। ऐसे जब समय मिले तब किया जा सकता है। लेकिन एक बात का ध्यान रहे कि खाना खाने के करीब तीन घंटे बाद ही योग करना चाहिए। यानी नहीं खाली पेट होना चाहिए।


    योग नियमित करना-: ऐसे तो कहा गया है कि किसी भी काम को नियमित करने से अधिक लाभ एवं उस काम में सफलता प्राप्त होता है। ऐसेे कहा भी गया है कि काम ही काम को सीखता है। उसी तरह योग को भी नियमित करने से अनेकों प्रकार का लाभ होता है। जैसे मन में शांति, शरीर के अंदर की शक्ति, रोग से लड़ने के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है।


    योग करने का सही तरीका-: योग करने का सही तरीका होना अति आवश्यक है। योग की स्थिति या उसके बारे में जानने के लिए बाबा रामदेव का योगाभ्यास के किताब जरूर देखें।


    योग कितनी बार करें-: ऐसे योग को 24 घंंटे में 2 बार करना चाहिए। वैसे आप अपने समय के अनुसार इसे एक या दो बार कर सकते हैं।



    Father's day (पिता दिवस)

    Father's day (पिता दिवस)

    पिता के लिए एक पिता दिवस 2019/ father's day 2019  के रूप में मनाये जाते हैं। " जिस प्रकार डॉक्टर्स डे और मदर्स डे मनाते हैं, उसी प्रकार पिता दिवस या फादर्स डे मनाते है। "

    father's day 2019 in india
    Father's day


    Father's day kab manaya jata   



    प्रत्येक वर्ष जून के तीसरे सप्ताह के रविवार को father's day मनाया जाता है। 2019 में father's day 16 जून को मनाया जाएगा।


    वैसे तो प्राचीन काल सेेेे ही पिता का सम्मान होता रहा है, चाहें वह जो भी काल रहा हो। इसलिए मानव समाज ने संसार के सभी पिता को सम्मान देने के लिए एक दिन चुना गया, जिसे father's day कहते हैं।


    इस दिन सभी लोग अपने पिता को सम्मान, आदर, इज्जत, प्यार करते हैं, और पुरानी बातो को याद कर बहुत खुश होते, एक दूसरे से विशेष बातें किया करते हैं। फिर पुत्र, पिता को  उपहार देते हैं, और उनसे आशीर्वाद एवं प्यार लिया करते हैं।   

    father's day in india, 2019 अब भारत में भी धीरे धीरे father's day प्रचलित होने लगा है। भारतीय लोग भी father's day पर बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने लगे हैं। तथा अपने पिता को आदर्श मान कर उनका सम्मान एवं आदर करते हैं।


    आमतौर पर देखा जाता है कि लोग अपने पिता के सम्मान  में खुलकर बातें नहीं कर पाते हैं। लेकिन अब father's day के दिन, पुत्र अपने पिता से दिल खोलकर बातें करेंगें।


    father's day सबसे पहले 1908 में मनाया गया। विश्व के कुछ देशों में अलग अलग दिन फादर्स डे मनाते हैं। लेकिन 1910 से father's day को नियमित रूप से प्रत्येक वर्ष मनाने का निर्णय लिया गया है।


    अमेरिका एवं कई ऐसे देशो में father's day के अवसर पर अधिकारीक अवकाश की घोषणा की गई हैं।


    जून के तीसरे सप्ताह के रविवार के दिन पूरा विश्व 16 जून को father's day मनाएगा।

    अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day)
























    बच्चें परीक्षा में कैसे अच्छे अंक प्राप्त करें।How to get good marks in children's examination.)

    बच्चें परीक्षा में कैसे अच्छे अंक प्राप्त करें। How to get good marks in children's examination.

    वैसे तो प्रत्येक छात्रों के मन में ख्वाहिश होता है कि परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करें। भले वह कम या अधिक पढ़ाई करता हो। फिर भी परीक्षा के समय वे चाहते हैं कि उनका भी अच्छा अंक प्राप्त हो।

    बच्चें परीक्षा में कैसे अच्छे अंक प्राप्त करें। How to get good marks in children's  इसके बारे में, मैं इस आर्टिकल में चर्चा या बताने जा रहा हूँँ। यह छोटा सा टिप्स है, जो आप लोग को परीक्षा में सफलता पाने के अचूक मंत्र या अच्छा अंक लाने में,यह पोस्ट मददगार साबित होगा।

    लेकिन एक बात मैं बताना चाहूँँगा कि परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना, कोई एक दिन का बात नहीं है, इसके लिए रेगुलर पढ़ाई करना अति आवश्यक है। तब आप परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं। यह पोस्ट उन लोगों के लिए बिल्कुल नहीं है जो परीक्षा के समय ही पढ़ाई या किताबे उठाते हो। वैसे विद्यार्थी हमारे पोस्ट को न पढ़े हैं।


    अगर आप चाहते हैं कि परीक्षा में अच्छे अंक कैसे लाएं तो प्रतिदिन किसी भी समय चार सेे पाँँच घंंटे कठिन परिश्रम के साथ पढ़ाई करने चाहिए।



    छात्रों को सभी विषयों पर ध्यान देना आवश्यक है, अगर किसी एक विषय में अधिक अंक और किसी में कम अंक तो ठीक नहीं है। इसलिए सामान्य रुप से सभी विषयों पर ध्यान देना चाहिए। ताकि सभी विषयों में अच्छे अंक ला सके।


    परीक्षा में कैसे अच्छे अंक प्राप्त करें। How to get good marks in the exam.



    1) आत्म विश्वास-: परीक्षा के दौरान विद्यार्थी को खुद पर यकीन करना चाहिए और बिल्कुल आत्मविश्वास के साथ परीक्षा केंद्र पर जाना चाहिए। अपनी क्षमता पर विश्वास कर के परीक्षा दे।


    2) कठिन परिश्रम करे-: विद्यार्थी को हमेशा मन,लगन,उत्साह एवं कठिन परिश्रम के साथ पढ़ाई करना चाहिए। कठिन परिश्रम करने से परीक्षा में अच्छे अंक या परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकते है।


    3) पहले से याद किया गया, उसको दुहरा ले-: पहले से पढ़ा या याद किया हुआ, एक बार जरूर दोहरा लें। ताकि परीक्षा में अधिक अंक लाने की संभावना रहता है।


    4) प्रतिदिन सुबह योग एवं meditation करने चाहिए-: विद्यार्थी जीवन हो या गृहस्थ जीवन योग और मेडिटेशन अवश्य करना चाहिए। जिसे स्मरण शक्ति एवं दिमाग तेज होता है। जिस करण हम परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को योग और मेडिटेशन प्रतिदिन करना चाहिए।


    5)निरंतरता-: किसी भी छात्र को निरंतर अध्ययन करना अति आवश्यक है क्योंकि निरंतर अध्ययन करने से एकाग्रता एवं यादस्थ बनी रहती है। प्रतिदिन चैप्टरवाइज पढ़ाई होते रहता है। उससे याद करने या समझने में बहुत लाभ मिलता है। इसलिए छात्रों से अनुरोध है कि निरंतर अध्ययन करते रहें ताकि परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें   



    परीक्षा में जाने से पहले क्या करें-:

    परीक्षा के समय बच्चे को सामान्य अवस्था में रहना चाहिए।

    परीक्षा के एक दिन पहले किताब नहीं पढे़। Notes, सुत्र
    आदि, हल्का फूल्का देख ले।

    परीक्षार्थी को जहां शोरगुल या हल्ला हो वहां न जाय ।

    अधिक बोल- बोल कर बातचीत न करे,कम बोले।

    परीक्षा के समय से 30 मीनट पहले परीक्षाकेन्द्र पर पहुचें।

    Answer sheet पर साफ सुथरा क्रमांक कोड़, क्रमांक, पंजीयन संख्या आदि लिखे।

    Question को ध्यानपूर्वक एक या दो बार पढ़े और तब Answer दे।

    सफलता आपके कदम चूमेगी 

    A man prefect A more then practice






    ख़तरनाक रेडिएशन से कैसे बचें। HOW TO AVOID DANGEROUS RADIATION.

    ख़तरनाक रेडिएशन से कैसे बचें How to Avoid Dangerous Radiation.

    आज के इस संसार में हर इंसान खतरनाक रेडिएशन के शिकार होते जा रहे हैं। लोगो के मानसिक तनाव, बहरापन एवं अन्य कई खतरनाक मस्तिष्क रोग भी उत्पन्न होता है। इस मानसिक तनाव एवं खतरनाक रेडिएशन का कारण मोबाइल फोन है।

    आज के युग में युवा, वृद्ध तथा छोटे बच्चे भी मोबाइल फोन रखना एक अभिन्न अंग बन चुका है। लेकिन बहुत लोगों को यह पता नहीं है कि मोबाइल से खतरनाक रेडिएशन निकलता है।

    रेडिएशन क्या है?

    रेडिएशन एक प्रकार का किरण है, जो मोबाइल के द्वारा हम सभी के पास आसानी से पहुंच पाता है। हमारे मस्तिष्क एवं अन्य खतरनाक बीमारियों का कारण होता है।

    तो आज हम लोग इस आर्टिकल में जानेंगे कि खतरनाक रेडिएशन से कैसे बचें? HOW TO AVOID DANGEROUS RADIATION.

    ▶️अधिकांश व्यक्ति रात्रि में सोते समय मोबाइल को अपने पास या सिर के तरफ रखते हैं। लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। रात्रि में सोते समय मोबाइल को कम से कम 4 से 5 फीट की दूरी पर रखें। ताकि खतरनाक रेडिएशन से बचा जा सके।

    ▶️मोबाइल का टावर या सिगनल न मिलने पर बातें नहीं करना चाहिए। क्योंकि मोबाइल का सिगनल न मिलने के समय अधिक मात्रा में रेडिएशन उत्पन्न होता है।

    ▶️कम से कम मोबाइल का प्रयोग करना उचित होगा। आज कल के युवा अधिक से अधिक फेसबुक, व्हाट्सएप एवं अन्य सोशल मीडिया पर समय बिताते रहते हैं। इस कारण रेडिएशन के खतरा बना रहता है।

    ▶️सुबह में मोबाइल का प्रयोग न करें। जब हम लोग रात में सो कर सुबह उठते हैं तो हमें कम से कम दो-तीन घंटा मोबाइल से दूर रहना चाहिए।

    ▶️ 90% लोग मोबाइल में गेम खेलते हैं। वह जाने और अनजाने में रेडिएशन के शिकार हो रहे हैं। इसलिए मोबाइल में गेम नहीं खेलना चाहिए। मोबाइल में गेम खेलने से हानिकारक रेडिएशन निकलते रहता हैं। जिस कारण हमें कई रोगों का सामना करना पड़ता है।

    निष्कर्ष-: आज की युवा पीढ़ी मोबाइल पर गेम खेलते, सोशल मीडिया एवं व्हाट्सएप पर घंटो समय बिताते रहते हैं। आज हर इंसान रेडिएशन से घिर चुके है। मोबाइल रेडिएशन चेक नंबर,मोबाइल रेडिएशन चिप,मोबाइल रेडिएशन क्या है,मोबाइल रेडिएशन के दुष्प्रभाव,मोबाइल रेडिएशन कितना होना चाहिए,एंटी रेडिएशन चिप क्या है,मोबाइल से होने वाली बीमारी,रेडिएशन के साइड इफ़ेक्ट आदि।

















    शिक्षक का कर्तव्य (Teacher's duty)

    शिक्षक का कर्तव्य (Teacher's duty)

    आज इस आर्टिकल में शिक्षक के कर्तव्य (Teacher's duty) के बारे में हम लोग जानेंगे।

    बात उन दिनों की है, जब मेरी बेटी नौवीं की छात्रा थी। पढ़ाई का दबाव उसे अंदर ही अंदर कमजोर कर रहा था जबकि वह पढ़ने में बहुत तेज है। परिणाम यह हुआ कि वह बीमार हो गई। आठवीं कक्षा में उसने 90.2 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।
    शिक्षक का कर्तव्य (Teacher's duty)
    शिक्षक का कर्तव्य (Teacher's duty)


    आज के समय में पढ़ाई का दबाव बच्चों को मानसिक और शारीरिक तौर पर तेजी से बीमार बना रहा है और ज्यादातर अभिभावक इस बात से अनजान हैं। यह बात मुझे तब मालूम हुई, जब एक दिन स्कूल से वापस आने के बाद मेरी बेटी ने कमजोरी और थकान की बात की वह कितनी बीमार थी। इसका अनुमान मुझे तब लगा जब चिकित्सक ने उसका ब्लड प्रेशर लो होने की बात बताई।


    मैंने उसे कई चिकित्सकों से जांच कराया पर कोई सुधार नहीं हुआ। इस बात को लेकर मैं हमेशा तनाव में रहा करता था। मुझे महसूस हुआ कि प्रतियोगिता की अंधी दौड़ में आज के बच्चे कितना अधिक सामाजिक और मानसिक दबाव का दंश झेल रहे हैं। पिता होने के नाते बेटी के कष्ट को किस तरह मैं सहन कर रहा था यह बता पाना मुश्किल है। मैं पेशे से स्कूल अध्यापक हूंँ।
    शिक्षक का कर्तव्य (Teacher's duty)
    शिक्षक का कर्तव्य (Teacher's duty)


    स्कूल से आने के बाद मेरा ज्यादातर समय बेटी को पढ़ाने में बीतता था। जिस चिकित्सक के बारे में बताते मैं उसके पास दौड़ा चला जाता। जब आप बहुत कष्ट में होते हैं तो ईश्वर ही कोई रास्ता बनाता है।


    मेरे मन में विचार आया कि मैं तो शिक्षक हूं क्यों न कुछ ऐसा किया जाए कि मेरी बेटी के तरह किसी अन्य विद्यार्थी को यह परेशानी न झेलनी पड़े।


    मैंने छात्रों के लिए मैथ एंड साइंस के अंतर्गत पाठ्यक्रम में शामिल पुस्तकों की विषयवस्तु को सहज भाषा में (हिंदी व अंग्रेजी) क्रमबद्ध तरीके से तैयार किया। अथक प्रयास के बाद लगभग आठ महीनों की मेहनत में मैं यह कार्य पूर्ण कर सका।
    शिक्षक का कर्तव्य (Teacher's duty)
    शिक्षक का कर्तव्य (Teacher's duty)

    विषय वस्तु को सरल,रोचक,बोधगम्य बनाने और छात्रों को स्वयं मूल्यांकन करने के लिए 150 प्रश्नों की एक क्वेश्चन बैंक तैयार की।


    मेरे द्वारा विद्यार्थियों के लिए किये गये, इस काम से मुझे खूब सराहना मिली। यह बात अलग है कि बाजार में हर विषय की ढेरों किताबें, गाइड, क्वेश्चन बैंक आदि उपलब्ध है, लेकिन इसके लिए बच्चों को काफी कीमत भी चुकानी पड़ती है और इतनी अधिक पठन सामग्री होती है कि बच्चे असमंजस की स्थिति में रहते हैं।


    जब वही पाठ्यक्रम सहज और रोचक ढंग से संक्षिप्त भाषा में समझाया जाता है तो बच्चों को संबंधित विषय से डर नहीं लगता है।

    यह सब करने का मेरा उद्देश्य था कि बच्चे पढ़ाई को मनोरंजक अंदाज में समझें और उन्हें किसी तरह का मानसिक दबाव न झेलना पड़े, क्योंकि मैंने अपनी बेटी के परीक्षा के तनाव और उससे उत्पन्न कष्ट को देखा था।


    वास्तव में यह काम मेरे लिए कड़ी चुनौती था, क्योंकि मेरी बेटी पढ़ाई के तनाव के चलते ही बीमार हुई थी, पर भगवान ने मेरा साथ दिया और मैं अपने मिशन में कामयाब रहा।


    मैं संक्षेप में सिर्फ इतना ही कहूंगा कि शिक्षा जरूरी है लेकिन बच्चों पर इतना प्रेशर न बनाए कि वे मानसिक रूप से कमजोर हो जाए या किसी बीमारी का शिकार हो जाए। मेरे इस प्रयास में कई शिक्षकों ने अपने विषय को सहज ढंग से लिखने का वादा किया।


    इस कहानी के माध्यम से मैं सभी शिक्षकों और अभिभावकों से कहना चाहता हूं कि जीवन में किया गया छोटा सा प्रयास सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काफी होता है।


    "हम भले ही सूरज न बन सकें तो क्या हुआ, एक दीपक बन कर मार्ग दिखाने का माध्यम जरूर बन सकते हैं।" 


    शिक्षक का दायित्व एवं कर्तव्य बहुत जिम्मेदारी वाला होता है। इसलिए उन्हें ऐसे काम करने चाहिए, जो विद्यार्थियों का भविष्य संवारने में सहायक हो।

    पढ़ाई के दौरान विद्यार्थी अनावश्यक सोचना बंद कैसे करें। How do the students stop thinking unnecessary during their studies?

    पढ़ाई के दौरान विद्यार्थी अनावश्यक सोचना बंद कैसे करें। How do the students stop thinking unnecessary during their studies?


    90% छात्र पढ़ाई के दौरान अनावश्यक रूप से सोचते रहते हैं। अभिभावक, माता-पिता सोचते हैं कि हमारे बच्चे पढ़ रहे हैं। लेकिन अधिकांश बच्चे पढ़ाई के दौरान अनावश्यक सोचते हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।

    यह केवल एक विद्यार्थी या एक छात्र की बात नहीं हो रहा है। ऐसे हजारों विद्यार्थियों के साथ होता है।

    तो आज मैं पढ़ाई के दौरान विद्यार्थी अनावश्यक सोचना बंद कैसे करें। How do the students stop thinking unnecessary during their studies? इसके बारे में जानने का प्रयास करेंगे।

    हमारे मस्तिष्क में मन दो प्रकार के होते हैं। 


    1) चेतन। 
    2) अवचेतन। 

    चेतन या अवचेतन पर निर्भर करता है। 

    उम्र दोष

    बैठकर न पढ़ना।

    हाथ पैर न धोकर पढ़ाई के लिए बैठना। 

    गलत तरीकों से बैठकर पढ़ना। 

    गाल या सिर पर हाथ रख कर पढ़ना।

    लेट कर पढ़ाई करना।

    मानसिक दोष। 

    अनुवांशिक दोष।

    अधिक बोलने वाला हो।

    झगड़ालू प्रवृत्ति के होना।

    किसी की बातें न सुनना। 

    पढ़ाई के दौरान विद्यार्थी अनावश्यक सोचना बंद कैसे करें। How do the students stop thinking unnecessary during their studies?



    ध्यान केंद्रित करना-: छात्रों को ध्यान केंद्रित करके पढ़ाई करना चाहिए। ताकि उनको बहुत बढ़ियाँ से समझ में आने लगे। छात्रों के पढ़ाई के दौरान अनावश्यक सोच न उत्पन्न हो। इसके लिए ध्यान केंद्रित करके पढ़ाई करना अति आवश्यक है।


    हाथ पैर धोकर पढ़ना-: कभी भी पढ़ाई करने से पहले हाथ पैर को धोकर पढ़ाई करने के लिए बैठना चाहिए। इससे मन एकाग्र होता है। अनावश्यक सोच नहीं उत्पन्न होता है


    योग अभ्यास करना-: छात्रों को नियमित योग अभ्यास करना चाहिए। इससे मन एकाग्र एवं अनावश्यक सोचे में वृद्धि नहीं होता है।


    पढ़ाई का सही तरीका अपनाना-: छात्रों को पढ़ाई के लिए सही तरीका अपनाना चाहिए। जैसे-: टेबल कुर्सी पर पढ़ना तथा सीधे बैैठकर पढ़ाई करना चाहिए।

    आत्मविश्वास की जरूरत-: छात्रों को आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई करना चाहिए। ताकि छात्रों के मन में अनावश्यक सोच कभी भी उत्पन्न न हो।


    पॉजिटिव सोच होना-: पढ़ाई के दौरान पॉजिटिव सोच के होना अति  महत्वपूर्ण होता है। पॉजिटिव सोच के साथ हम लोग अपने जीवन में आगे बढ़ते हैं। जीवन की हर कठिन से कठिन काम पॉजिटिव सोच से आसानी से समाधान किया जा सकता है।


    कठिन परिश्रम करना -: पढ़ाई के दौरान कठिन परिश्रम करने से सफलता अति शीघ्र प्राप्त होता है। पढ़ाई के दौरान अनावश्यक सोच बिल्कुल नहीं होता है।


    सृजनात्मक गुण होना-: जो छात्र सृजनात्मक होते हैं, वह कभी भी अनावश्यक रूप से नहीं सोचते हैं। वे पढ़ाई बहुत  अच्छे तरीको से करते हैं, ताकि वे जीवन में सफलता प्राप्त कर सकें। वे अपने कर्मों पर हमेशा यकीन करते हैं, तथा स्वयं निर्णय लेने की क्षमता उनमें रहता है।


    छोटी-छोटी गलतियों को सुधार करना-: पढ़ाई के दौरान छोटी-छोटी गलतियों को सुधार करना अति आवश्यक होता है। जिससे कि पढ़ाई में अनावश्यक सोच नहीं उत्पन्न होता है।


    गंभीर मुद्रा में रहना-: गंभीर मुद्रा में पढ़ाई करने से समझदारी एवंं सफलता प्राप्त होता है। गंभीर मुद्रा में पढ़ाई करने सेे अनावश्यक सोच उत्पन्न नहीं होता।


    निष्कर्ष -: पढ़ाई के दौरान विद्यार्थी अनावश्यक सोचना बंद कैसे करें। How do the students stop thinking unnecessary during their studies? इसके लिए उपर्युक्त बातों को ध्यान
    देने योग है।

    तनाव या टेंशन को दूर करने का 7 महत्वपूर्ण उपाय। 7 important ways to overcome stress or tension

    तनाव या टेंशन को दूर करने का 7 महत्वपूर्ण उपाय। 7 important ways to overcome stress or tension

    जब एक बार मैं अपने वरीय शिक्षक श्री कुमार सिंह से पूछा कि सर आप प्रधानाध्यापक के पद क्यों नहीं ले रहे हैं? तब वरीय शिक्षक, प्रखर अनुभवी, आदरणीय, परम मित्र, बड़े भाई या fourth eye of A.K.S बाबा ने तार्किक उत्तर दिये मुझे टेंशन नहीं पेंशन चाहिए। प्रधानाध्यापक का पद नहीं "आ बैल मुझे मार" है।


    पहले की अपेक्षा इस पद में अधिक समस्या उत्पन्न होने लगा हैं। मैं बिल्कुल तनाव मेें नहीं रहना चाहता हूँँ। वरीय शिक्षक के कथनानुसार अगर जीवन का आनंद लेना है, तो टेंशन मुक्त रहने का प्रयास करें। टेंशन खत्म तो नहीं किया जा सकता है, लेकिन टेंशन को कम जरूर किया जा सकता है।

    टेंशन का नाम हम लोग अक्सर लिया करते हैं। शायद आपने भी टेंशन नामक प्राणी का नाम सुना या महसूस किया होगा। टेंशन से स्वास्थ्य खराब होने का भय बना रहता है।

    इस संसार में जो मानव या प्राणी हैं उनको जरूर कम या अधिक टेंशन होगा। क्योंकि टेंशन मानव के जिंदगी का अभिन्न अंग बन चुका है।

    टेंशन क्या है ?

    किसी समस्या पर अधिक देर तक चिंतापूर्वक सोचते रहना ही तनाव या टेंशन है। लेकिन उस तनाव को अधिक बढ़ने न दें।

    हमारे तेजस्वी शिक्षक, महानुभाव ने कहा है कि इस प्रतियोगी संसार में आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हमेशा ही टेंशन में रहा करते हैं। टेंशन का अन्य नाम चिंता या तनाव है। अगर अपने लक्ष्य को प्राप्त करना है तो टेंशन का मुख्य भूमिका होता है।

    तनाव या टेंशन को दूर करने का 7 महत्वपूर्ण उपाय। 7 important ways to overcome stress or tension.

    पढ़ाई का टेंशन-: अगर पढ़ाई का टेंशन नहीं लिया तो परीक्षा वाले दिन अधिक टेंशन होगा कि काश मैं पहले से पढ़ाई किया होता तो परीक्षा वाले दिन हमारे शरीर में हलचल हंगामा खलबली आफत नहीं आता। किसी कार्य को प्रतिदिन किया जाए तो टेंशन कम होता है।

    टेंशन को सकारात्मक बनाएँ-: टेंशन को ही सकारात्मक सोच बना ले यदि किसी भी छात्र को गणित विषय में टेंशन है तो गणित विषय को लेकर छात्र अधिक मेहनत करेेेगा। साथ
    ही साथ सकारात्मक सोच में भी बदल जाएगा। गणित विषय अच्छा हो जाएगा।

    संगीत सुनना-: किसी व्यक्ति को बहुत अधिक टेंशन है तो उन्हें संगीत सुनना या गुनगुनाने से भी तनाव कम होता है। तनाव वाले व्यक्ति को तुरंंत राहत महसूस होता है।

    खेल खेलना-: अगर मोबाइल में गेम खेल रहे हैं तो टेंशन कम तो जरूर होगा। लेकिन खुले स्थानों पर जहां स्वच्छ हवाएं चलती हो, वहां खेल खेलने से अधिक आनंद आएगा। उस समय तनाव से बहुत राहत मिलेगा।

    परिवारिक माहौल -: यदि अधिक तनाव महसूस कर रहे हैं, तो अपने परिवार के साथ यानी बच्चों के साथ घूमने या खेल खेलने से भी तनाव में राहत मिलता है।

    मित्रों से मिलना-: किसी ऐसे बात से आप तनाव में हैं जो अपने दोस्तों,मां,पिता,पत्नी आदि से मिलकर भी समस्या  यानी तनाव को दूर किया जा सकता है।

    ध्यान एवं योग -: अगर प्रातःकाल प्रतिदिन खुले स्थान पर जहां स्वच्छ हवाएं बहती हो,उस स्थान पर प्रतिदिन 10:00 मिनट योगाभ्यास एवं ध्यान केंद्रित करने से कभी भी तनाव में नहीं रह सकते हैं। ध्यान एवंं योग नियमित करना होगा।

    निष्कर्ष-: जब किसी भी व्यक्ति को तनाव अधिक होने या बढ़ने लगे तब ऊपर दिए गए कार्यों को करें। जो आपको पसंद हो इसके बाद आपका सारा तनाव बिल्कुल ही गायब हो जाएगा।

    तनाव या टेंशन को दूर करने का 7 महत्वपूर्ण उपाय। 7 important ways to overcome stress or tension

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