बच्चों के स्मरण शक्ति कैसे बढ़ाए (How to increase children's memory)

दोस्तों आज हम इस आर्टिकल में बच्चों के स्मरण शक्ति कैसे बढ़ाएं How to increase children's memory  पर हम लोग चर्चा करेंगे और इसके बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दे रहे हैं।

 

बच्चों के स्मरण शक्ति बढ़ाए Increase children's memor

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ी हुई बातों को लंबे समय तक याद रखे, पढ़ाई में ध्यान लगाए और परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करे। लेकिन आज के डिजिटल युग में मोबाइल, टीवी और अन्य स्क्रीन के बढ़ते उपयोग के कारण बच्चों की एकाग्रता और स्मरण शक्ति पर प्रभाव पड़ रहा है।

आजकल अधिकांशतः देखा जा रहा है कि बच्चों के स्मरण शक्ति (Memory of children) में कमी होते जा रहा है। बच्चों के साथ उनके माता-पिता भाई-बहन एवं अन्य सभी सदस्यों को यह समस्या है।

आमतौर पर देखा गया है कि पहले की अपेक्षा स्मरण शक्ति में बहुत कमी आई है। जिसका एक ही कारण है, टेक्नोलॉजी यानी मोबाइल। जब से मोबाइल आया तब से बहुतों का स्मरण शक्ति में कमी होने लगा।


विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों के ध्यान (Attention Span) को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल स्मरण शक्ति बढ़ाने के उपाय अपनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मोबाइल और टीवी के उपयोग को भी संतुलित रखना आवश्यक है।

तो आज हम लोग खेल-खेल में बच्चों के स्मरण शक्ति बढ़ाने के तरीकों के बारे में जानेंगे। एक बात ध्यान देने योग्य है कि कोई भी काम आत्मविश्वास के साथ करने पर वह काम अवश्य होता है।

बच्चों के स्मरण शक्ति बढ़ाए Increase children's memor
बच्चों के स्मरण शक्ति बढ़ाए Increase children's memor



हालाँकि स्मरण शक्ति कोई जन्मजात गुण नहीं है, बल्कि सही खान-पान, नियमित अभ्यास, पर्याप्त नींद और मानसिक व्यायाम से इसे बेहतर बनाया जा सकता है। इस लेख में हम कुछ आसान और व्यावहारिक उपायों के बारे में जानेंगे जिन्हें अपनाकर बच्चों की याददाश्त को मजबूत किया जा सकता है।

स्मरण शक्ति बढ़ाने के निम्न तरीके ―: Following ways to increase memory 


➡️सुबह उठने के बाद एवं रात्रि में सोने से पहले सकारात्मक सोच के साथ ये वाक्य बोलें। 

सकारात्मक सोच बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाती है। जब बच्चा स्वयं पर विश्वास करता है कि वह चीजों को याद रख सकता है, तब उसका सीखने का उत्साह भी बढ़ता है।

मैं अपने स्मरण शक्ति पर विश्वास करता हूँ।                     
मेरा स्मरण शक्ति बहुत अच्छा है।

स्मरण शक्ति बढ़ाने में संतुलित आहार का महत्व

बच्चों के मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए प्रोटीन, विटामिन, आयरन और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्व महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए केवल बादाम या आंवला ही नहीं, बल्कि हरी सब्जियाँ, मौसमी फल, दूध, दालें और पर्याप्त पानी भी आवश्यक हैं।

➡️अपने बच्चे को कागजी बदाम की दो कलियों को रात के समय पानी में फूलने के लिए डाल दें। सुबह के समय ब्रश करने के बाद एक पत्थर पर रगड़ कर प्रतिदिन दूध के साथ दे।

➡️20 से 25 ग्राम मूंग को रात में फूलने के लिए डाल दें। सुबह के समय ब्रश करने के बाद प्रतिदिन मूंग के साथ गुड़ का सेवन करें।


➡️सुबह ब्रश करने के बाद खाली पेट मात्र एक कच्चा आंवला प्रतिदिन खाने से स्मरण शक्ति में वृद्धि होता है।

 
➡️अपने बच्चे को सुबह सुबह प्रतिदिन एक सेव(apple) खिलाने के 10 मिनट बाद एक कप दूध पिला दे। 

➡️प्रात: कालीन सूर्योदय से पहले हरे - हरे घासों पर खाली पैर (बिना चपल्ल) 10 से 20 मिनट तक टहलें।

➡️प्रातः कालीन सूर्योदय से पहले प्रतिदिन मात्र 10 मिनट हिंदी या इंग्लिश का सस्वर वाचन या मौन वाचन। उसमें 1 मिनट में अधिक से अधिक शब्द पढ़ने का प्रयास करें । जैसे 1 मिनट में 250 / 300 से ऊपर शब्द पढ़ने का प्रयास करे।

बार-बार अभ्यास क्यों जरूरी है?


मनोवैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार जब कोई जानकारी पढ़ने के साथ-साथ लिखी भी जाती है, तो वह मस्तिष्क में अधिक समय तक सुरक्षित रहती है। इसलिए बच्चों को केवल पढ़ने के बजाय लिखने का अभ्यास भी करना चाहिए।

➡️प्रतिदिन सुबह में योग - अभ्यास और मेडिटेशन करें।

➡️याद करने से पहले एक बार देख कर लिखिए, फिर उसके बाद याद कर के दो बार बिना देख कर लिखें।

➡️एक टेबल पर बहुत सारे वस्तु रखा हुआ है, तब मात्र 1 मिनट के लिए टेबल पर रखा सभी वस्तुओं को ध्यान से देख ले ।उसके बाद टेबल के सभी वस्तुओं को बिना देखे कॉपी पर लिखने से स्मरण शक्ति में वृद्धि होती है।

स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए कुछ अतिरिक्त गतिविधियाँ


पहेलियाँ (Puzzles) हल करना।
शतरंज खेलना।
कविता या कहानी याद करना।
नई भाषा के शब्द सीखना।
चित्र देखकर उसके बारे में बताना।
मानसिक गणना (Mental Math) करना।

➡️बच्चों के स्मरण शक्ति बढ़ाने के सबसे अच्छा तरीका एक हल्का बैट और टेनिस गेंद लें। बैट को अपने हाथों से उठाकर अपने छाती के सामने रखें , उस पर गेंद को रख कर धीरे-धीरे गेंद को उछालें।गेंद को गिरने न दें। यह प्रक्रिया अपने समयानुसार  प्रतिदिन 10 से 15 मिनट तक करें।

खेल-खेल में स्मरण शक्ति बढ़ाने का मेरा अनुभव

बच्चों की स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए मैंने कई तरीकों के बारे में सुना और पढ़ा है, लेकिन मेरे व्यक्तिगत अनुभव में एक तरीका सबसे अधिक रोचक और प्रभावी लगा। बचपन में मैं एक हल्का बैट और टेनिस गेंद लेकर अभ्यास किया करता था। बैट को छाती के सामने सीधा पकड़कर उस पर गेंद को धीरे-धीरे उछालता था और कोशिश करता था कि गेंद नीचे न गिरे।

शुरुआत में यह काम आसान नहीं लगा, लेकिन कुछ दिनों के अभ्यास के बाद मेरा ध्यान (Concentration) बढ़ने लगा। इस खेल में लगातार गेंद पर नजर बनाए रखनी पड़ती है, जिससे एकाग्रता और मानसिक सतर्कता का अभ्यास होता है। बाद में मैंने अपने छोटे भाई को भी यह गतिविधि करने के लिए प्रेरित किया। उसे भी यह खेल काफी पसंद आया और वह इसे नियमित रूप से करने लगा।

मेरे अनुभव के अनुसार यह गतिविधि बच्चों के लिए मनोरंजक भी है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता विकसित करने में भी सहायक हो सकती है। हालांकि हर बच्चे का अनुभव अलग हो सकता है, लेकिन खेल-खेल में सीखने और अभ्यास करने का यह तरीका बच्चों को अवश्य पसंद आता है।

मेरा अनुभव

"बचपन में मैं स्वयं इस गतिविधि को नियमित रूप से करता था। बैट पर टेनिस गेंद को उछालते समय पूरा ध्यान गेंद पर रखना पड़ता था। इससे मेरी एकाग्रता बढ़ी और पढ़ाई के समय भी ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली। बाद में मैंने अपने छोटे भाई को भी यह अभ्यास कराया। उसे भी यह खेल काफी पसंद आया। मेरे अनुभव में खेल-खेल में सीखने का यह तरीका बच्चों के लिए रोचक और उपयोगी है।"

एक शिक्षक और अभिभावकों से लगातार बातचीत करने के दौरान मैंने पाया है कि आज अधिकांश बच्चे पढ़ी हुई बातों को जल्दी भूल जाते हैं। कई बार माता-पिता शिकायत करते हैं कि बच्चा घंटों पढ़ाई करता है, लेकिन कुछ दिनों बाद उसे वही बातें याद नहीं रहतीं।

मेरे अनुभव में स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए केवल रटने पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है। जब बच्चे नियमित रूप से पढ़ने के साथ लिखने का अभ्यास करते हैं, पर्याप्त नींद लेते हैं, पौष्टिक भोजन करते हैं और मोबाइल का उपयोग सीमित करते हैं, तब उनकी याद रखने की क्षमता में धीरे-धीरे सुधार दिखाई देता है।

मैंने यह भी देखा है कि जिन बच्चों में आत्मविश्वास अधिक होता है, वे पढ़ी हुई बातों को लंबे समय तक याद रख पाते हैं। इसलिए बच्चों को बार-बार डाँटने के बजाय उनका उत्साह बढ़ाना अधिक लाभदायक होता है।

बच्चों को अच्छे संस्कार देने के तरीका पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। 

पाठकों के लिए मेरी राय

यदि आपका बच्चा पढ़ाई में कमजोर है या पढ़ी हुई बातें जल्दी भूल जाता है, तो तुरंत चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। स्मरण शक्ति एक ऐसी क्षमता है जिसे धीरे-धीरे विकसित किया जा सकता है।

मेरी सलाह है कि आप एक साथ सभी उपाय अपनाने की बजाय 3 से 4 अच्छे उपाय चुनें और कम से कम 30 दिनों तक नियमित रूप से उनका पालन करें। साथ ही बच्चे की तुलना दूसरे बच्चों से न करें। प्रत्येक बच्चे की सीखने और याद रखने की क्षमता अलग होती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चे को सकारात्मक वातावरण दें। जब बच्चा तनावमुक्त रहता है, तब उसका मस्तिष्क बेहतर तरीके से सीखता और याद रखता है।

निष्कर्ष

बच्चों की स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए कोई जादुई उपाय नहीं होता। नियमित अभ्यास, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, योग, ध्यान और सकारात्मक वातावरण मिलकर याददाश्त को बेहतर बनाते हैं। यदि माता-पिता धैर्यपूर्वक बच्चों का मार्गदर्शन करें और मोबाइल के उपयोग को नियंत्रित रखें, तो बच्चे न केवल पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करेंगे बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। छोटी-छोटी अच्छी आदतें भविष्य में बड़े परिणाम देती हैं।

आवेदन पत्र कैसे लिखें(How to write application form.) पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

FAQ : बच्चों की स्मरण शक्ति कैसे बढ़ाएं?


1. बच्चों की स्मरण शक्ति कमजोर क्यों हो जाती है?

अत्यधिक मोबाइल उपयोग, पर्याप्त नींद न लेना, असंतुलित भोजन, तनाव, शारीरिक गतिविधियों की कमी और पढ़ाई में रुचि न होना स्मरण शक्ति कमजोर होने के प्रमुख कारण हो सकते हैं।

2. क्या बादाम खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है?

बादाम में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं। हालांकि केवल बादाम खाने से ही स्मरण शक्ति नहीं बढ़ती, बल्कि संतुलित आहार और अच्छी जीवनशैली भी आवश्यक है।

3. बच्चों को कितनी नींद लेनी चाहिए?

स्कूल जाने वाले बच्चों को सामान्यतः 9 से 11 घंटे की नींद की आवश्यकता होती है। पर्याप्त नींद याददाश्त और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करती है।

4. क्या मोबाइल फोन बच्चों की याददाश्त पर प्रभाव डालता है?

अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों की एकाग्रता और ध्यान क्षमता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए मोबाइल का उपयोग सीमित और नियंत्रित होना चाहिए।

5. पढ़ा हुआ लंबे समय तक याद रखने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

पढ़ने के बाद लिखकर अभ्यास करना, नियमित पुनरावृत्ति (Revision) करना और सीखी गई बातों को दूसरों को समझाना याद रखने के प्रभावी तरीके हैं।

6. क्या योग और ध्यान से स्मरण शक्ति बढ़ती है?

योग, प्राणायाम और ध्यान मानसिक एकाग्रता को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं, जिससे सीखने और याद रखने की क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

7. बच्चों के लिए कौन-से खेल स्मरण शक्ति बढ़ाने में सहायक हैं?

शतरंज, पहेलियाँ, शब्द-खेल, मेमोरी कार्ड गेम और मानसिक गणना वाले खेल बच्चों की याददाश्त और एकाग्रता विकसित करने में सहायक हो सकते हैं।

8. क्या रोज़ाना पढ़ने की आदत स्मरण शक्ति बढ़ाती है?

हाँ, नियमित पढ़ने की आदत मस्तिष्क को सक्रिय रखती है और जानकारी को याद रखने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करती है।

9. क्या स्मरण शक्ति जन्मजात होती है?

कुछ हद तक प्राकृतिक क्षमता का प्रभाव हो सकता है, लेकिन अभ्यास, अनुशासन और सही आदतों से स्मरण शक्ति को काफी बेहतर बनाया जा सकता है।

10. बच्चों की स्मरण शक्ति बढ़ाने का सबसे सरल उपाय क्या है?

पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित पुनरावृत्ति, शारीरिक गतिविधि और सकारात्मक वातावरण—ये पाँच बातें सबसे सरल और प्रभावी उपाय मानी जाती हैं।

व्यक्तित्व के निर्माण में विद्यालय का योगदान।School's contribution in building personality


व्यक्तित्व के निर्माण में विद्यालय का योगदान।School's contribution in building personality.


प्रत्येक व्यक्ति में अपनी एक अलग पहचान या गुण होता है। एक दूसरे व्यक्ति के वह गुण या पहचान, किसी दूसरे व्यक्ति में नहीं होता है। प्रत्येक व्यक्ति एक दूसरे से भिन्न होता है। हर इंसान का अपना अलग-अलग विशिष्ट पहचान होता है। इसी पहचान या गुण के कारण उस व्यक्ति का व्यक्तित्व होता है। हर इंसान अलग-अलग कद काठी रंग एक दूसरे से भिन्न होते है। इसके स्वभाव संस्कार आदि में भिन्नता होता है। 

एक बालक के व्यक्तित्व के निर्माण में परिवार से कहीं अधिक समाज के वातावरण का प्रभाव पड़ता है। बच्चे के गुणों के निर्माण में परिवार की भूमिका अहम होता है। बच्चों के प्रथम पाठशाला परिवार होता है। उस परिवार के प्रथम शिक्षक मां होती हैं। मां ही बच्चों के व्यक्तित्व के को निखारती हैं। मां घर में ऐसा वातावरण का निर्माण करती है कि बच्चे के व्यक्तित्व सृजनात्मक एवं गुणात्मक होता है। उसी समय से बच्चों में अनेकों ऐसे गुणों का विकास होता है। अगर यही गुण रह जाए तो निश्चित ही बच्चे अपने जीवन में व्यक्तित्व के धनी, आत्मविश्वासी, दृढ़ पराक्रमी हो जायेंगें। लेकिन बच्चे बड़े होते ही समाज से बहुत कुछ सीखने लगते हैं।  

बच्चों के व्यक्तित्व के निर्माण में विद्यालय के शिक्षा अति आवश्यक है। विद्यालय के वातावरण से बच्चों के व्यक्तित्व के निर्माण में अधिक प्रभावशाली होता है। यदि बच्चे को विद्यालय में अनुकूल वातावरण प्राप्त हो तो वे सही दिशा में कदम रख सकते हैं। या वह अपने को प्रगति के पथ पर अग्रसर होते जाते हैं। 

व्यक्तित्व के निर्माण में विद्यालय का योगदान।School's contribution in building personality.


व्यक्तित्व के निर्माण में विद्यालय का योगदान।School's contribution in building personality.





यदि विद्यालय का अनुकूल वातावरण न रहा तो योग्य एवं होनहार बच्चे का व्यक्तित्व से वंचित हो जाते हैं। यदि बच्चे निम्न स्तर की योग्यता  रखने वाले बच्चों को अच्छे वातावरण के अनुसार योग बनाया जा सकता है। विद्यालय के वातावरण के अनुसार बच्चों को योग एवं गुणकारी बनाया जा सकता है। बच्चे की योग्यता एवं क्षमता कैसा भी हो, वह विद्यालय के अच्छे वातावरण जैसा ही होगा।

विद्यालय के अच्छे वातावरण में बच्चों की अच्छी आदतों का विकास  भी होता है। जिससे विद्यालय बच्चों को प्रभावित भी करता है। उनके व्यक्तित्व के निर्माण में परिवर्तन लाता है। विद्यालय के वातावरण से बच्चों में नैतिक विकास, शारीरिक विकास, मानसिक विकास, सामाजिक विकास के स्तर को ऊंचा उठाता है, ताकि वे परिवार समाज एवं विद्यालय में अपने आपको समायोजित कर सके।

विद्यालय में वातावरण को अच्छी तरीके से प्रभावित करने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होता है। जिससे बच्चों में सही मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन मिलता है। जिससे बच्चों में व्यक्तित्व का निर्माण होता है।

इसके फलस्वरूप कुछ बच्चों में कुंठा से ग्रसित होते हैं। शिक्षक के अच्छे आत्मीय व्यवहार के कारण धीरे-धीरे उन बच्चों को जो कुंठित के शिकार होते हैं। उनको उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन के कारण  बच्चे अच्छे कर पाते हैं। बच्चें शिक्षक के प्रति स्नेह, आदर का भाव अपने दिल में रखने लगते हैं। इससे बच्चों में व्यक्तित्व एवं चरित्र का निर्माण होता है। 

विद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य एवं शारीरिक स्वास्थ्य होना बहुत ही जरूरी होता है। विद्यालय के व्यक्तित्व में ज्ञान, कौशल एवं दृष्टिकोण का होना अति आवश्यक है। जिससे बच्चों में अनुशासन विकसित होता है। 

बच्चों में आत्म संयम, सहयोग, आपसी विचार एवं भाव आदि के गुणों को विकसित करने में सहायक होते हैं। विद्यालय को उत्तम स्वरूप देने के लिए बाल केंद्रित मनोविज्ञान की अवधारणा होना चाहिए। जिससे बच्चे विद्यालय की ओर आकृष्ट होते और सीखने में उनकी प्रेरणा मिलता है। 

विद्यालय का वातावरण स्वच्छ होना अति आवश्यक है। तभी बच्चों का मन प्रसन्न होता है। शिक्षक को विद्यालय के वातावरण को आनंददायक और कक्षा कक्ष को भी आनंदित बनाने अति आवश्यक होता है। ताकि व्यक्तित्व के निर्माण में विद्यालय का योगदान महत्वपूर्ण है।
School's contribution in building personality.





















उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन प्रतिभा को निखारता है।Proper guidance and encouragement enhances talent.

उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन प्रतिभा को निखारता है।(Proper guidance and encouragement enhances talent.)


जब विद्यार्थी सफलता का मुकाम हासिल करना चाहता है, या अपने जीवन को सफल करने के लिए जो उड़ान भरना चाहता है। उससे पूर्व अभिभावक व शिक्षक उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन उसके प्रतिभा को अवश्य ही निखारता है। 

अभिभावक व शिक्षक छात्रों के सुनहरे भविष्य के लिए उचित मार्गदर्शन दे सकते हैं। जिससे छात्रों के शरीर के अंदर, ऊर्जा उत्साह, जोश, एवं जुनून का संचार उत्पन्न होता है। जिससे विद्यार्थी जीवन में सफलता प्राप्त होता है।

हमेशा से ही देखा गया है कि छात्रों को विषय का चुनाव सही ढंग से नहीं कर पाते। कई छात्र-छात्राओं को देखा गया है कि बिना सोचे समझे विषय का चुनाव कर लेते हैं। बहुत सारे विद्यार्थी अपने दोस्तों, रिश्तेदार, भाई बहन को देखकर विषयों का चुनाव करते हैं। फिर बाद में उनको समझ आता है कि विषय का चुनाव गलत हो गया। बहुत से छात्र अपने अभिभावक या माता-पिता के दबाव में आकर विषय का चुनाव करते हैं। जिसके फलस्वरूप छात्रों को आगे चलकर वह विषय बोझिल  या उबाऊ लगने लगता है। कई छात्र-छात्राओं एक दूसरे के देखा देखी में विषयों का चुनाव करते हैं। जिस कारण उनको आगे समझ में नहीं आता या समझना मुश्किल हो जाता है।

जिस विद्यार्थी ने अपने विषय का चुनाव सोच समझ कर लिया है या उस विषय में वह ज्ञान या रूचि रखता है, तो वह विद्यार्थी हमेशा ही सफल होगा।

अभिभावक एवं शिक्षक को छात्रों एवं विद्यार्थियों को बीच-बीच में उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन देते रहें, ताकि अभिभावक
एवं शिक्षक को यह पता चलता रहे, कि विद्यार्थी लक्ष्य प्राप्त करने में सक्षम है या नहीं। अगर नहीं, तो विद्यार्थी को उचित मार्गदर्शन करने की जरूरत होता है। ताकि उचित मार्गदर्शन से छात्र अपने जीवन में लक्ष्य की प्राप्ति कर सके।

हमारे समझ से उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन अपने बच्चों को शुरुआती दिनों यानी 3 से 5 वर्ष के उम्र में ही शुरू करना चाहिए ताकि आगे अपने जीवन में हमेशा ही सफलता के मुकाम को हासिल कर सके।

लेकिन एक और बात यह है कि कोई जरूरी नहीं है कि 3 से 5 वर्ष के उम्र ही हो। आप जब चाहे तब से ही अपने बच्चों या छात्रों को उचित मार्गदर्शन कर सकते हैं। वहां मैं कम उम्र इसलिए कहा कि बच्चें को शुरुआत से ही उचित मार्गदर्शन देते रहे तो अपने जीवन में हर समय क्रियाशील रहेंगे।

अधिकांशतः विद्यार्थी 10वीं परीक्षा के बाद ही अपने लक्ष्य या सफलता को लेकर चिंतित रहते हैं। इस समय अभिभावक एवं शिक्षक को मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन नितांत ही आवश्यक है और समय उचित सलाह देना जरूरी होता है, क्योंकि बहुत सारे विद्यार्थी को उचित मार्गदर्शन प्राप्त न होने के बावजूद वह गलत रास्ते पर चल पड़ते हैं तथा विद्यार्थी अपने नैतिक पतन की ओर चल देते हैं। वे अपने जीवन जीने के लिए गलत तरीकों को अपनाते चले जाते हैं। इससे अपना जीवन बर्बाद कर लेते हैं। इसलिए ऐसे समय में हर अभिभावक एवं शिक्षक को बच्चों एवं छात्रों को उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन देना अति आवश्यक है। 
निष्कर्ष :-  उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन प्रतिभा को निखारता है। हमें अपने बच्चे एवं विद्यार्थी को बचपन से ही उचित मार्गदर्शन देना चाहिए। ताकि भविष्य में अपने जीवन को उस ऊंचाई पर ले जा सके। जहां से पीछे दिखने पर सभी छोटे या बौने रूपी दिखें। शिक्षक का कार्य केवल यह नहीं है कि शिक्षा देना, अपितु विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हो। अगर विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास होगा। तब विद्यार्थी का जीवन सफल होता है। उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन प्रतिभा को निखारता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि उचित मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन प्रतिभा को निखारता है। यह निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।